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रात खुली तो दिखा मेहनत की बर्बादी का मंजर

Fri, 07 Apr 2017 10:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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बृहस्पतिवार देर शाम को बेमौसम बारिश, तेज हवा और ओलावृष्टि के बाद से ही किसान फसलों के नुकसान को लेकर आशंकित थी। शुक्रवार को रात खुली तो किसान खेतों की तरफ दौड़ी। फसलों बर्बादी देखकर किसानों की आंखें फटी की फटी रह गई। छह महीने की हाड़तोड़ मेहनत पर मौसम ने एक घंटे में पानी फेर दिया। प्रशासन के प्रारंभिक आंकलन में 30 प्रतिशत से ज्यादा फसल बरबाद होने की बात सामने आई है। हालांकि प्रशासन इससे संतुष्ट नहीं है और न्याय पंचायत स्तर पर नुकसान का आंकलन करने के लिए कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाई गई हैं। गेहूं और आम की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।    

हरिद्वार जनपद में गेंहू और गन्ने की बहुतायत में पैदावार होती है। इन दिनों गेहूं की फसल काटने की तैयारी चल रही थी। बृहस्पतिवार की शाम मौसम का रुख अचानक ऐसा पलटा कि किसानों को काटकर खेत में रखी गई गेहूं की फसल उठाने का भी मौका नहीं मिला। वहीं कटाई के लिए तैयारी खड़ी फसल ओलावृष्टि और तेज हवा से पूरी तरह तबाह हो गई। शुक्रवार को कृषि विभाग और राजस्व विभाग ने अपने अपने स्तर से फसलों के नुकसान को प्रारंभिक आंकलन किया। जिसमें 30 प्रतिशत तक फसलें तबाह होने की बात सामने आई है, लेकिन धरातल पर नुकसान इससे कहीं ज्यादा है। इससे वाकिफ प्रशासन और विकास विभाग के अधिकारियों ने 30 प्रतिशत नुकसान की बात से नाइत्तेफाकी जताई।       
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जिलाधिकारी एसए मुरुगेशन के निर्देश पर शुक्रवार को सभी विभागों की एक बैठक बुलाई गई। जिसमें मुख्य विकास अधिकारी डा. मेहरबान सिंह बिष्ट ने न्याय पंचायत स्तर नुकसान के आंकलन के लिए कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाने के लिए निर्देशित किया। इस सर्वे की तहसील स्तर पर मॉनिटिरिंग का फैसला भी लिया गया है। बैठक में मुख्य कृषि अधिकारी जे पी तिवारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।      

बागवानी का आंकलन करेगा उद्यान विभाग      
 मौसम की मार आम व लीची की बागबानी पर भी बराबर पड़ी है। इन दिनों आम व लीची के पेड़ों पर बौर आने शुरू हो गए थे। तेज हवाओं से बौर के साथ पेड़ की डालियां और पूरे पेड़ ही टूट कर गिर पड़े हैं। ऐसे में इस बार आम व लीची की फसल कम होने की उम्मीद है। सीडीओ डा. मेहरबान सिंह बिष्ट ने बताया कि आम व लीची की फसल के नुकसान के लिए उद्यान विभाग को निर्देशित किया गया है।      
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प्रारंभिक आंकलन में 30 प्रतिशत फसलों का नुकसान सामने आया है, लेकिन यह संतोषजनक नहीं है। इससे ज्यादा नुकसान होने की पूरी संभावना है। कृषि व राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें न्याय पंचायत स्तर पर जाकर किसानों से नुकसान की जानकारी लेंगी। इस सर्वे की तहसील स्तर पर भी मॉनिटरिंग की जाएगी। जिसके बाद मुआवजे के लिए रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
- डा. मेहरबान सिंह बिष्ट, मुख्य विकास अधिकारी हरिद्वार  
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