हरिद्वार। अर्द्धकुंभ में नयी परंपरा शुरू करने के सभी प्रयास विफल हो गए हैं। एक स्नान को शाही स्नान बनाने के लिए कुछ अखाड़ों की ओर से प्रयास किए गए थे। लेकिन बैरागी अखाड़ों के बाद अब संन्यासी अखाड़ों ने भी इससे हाथ खींच लिए हैं। ऐसे में अब हरिद्वार अर्द्धकुंभ में कोई शाही स्नान नहीं होगा।
हरिद्वार अर्द्धकुंभ के साथ-साथ उज्जैन में इन्हीं महीनों में कुंभ मेला भरता है, अत: सभी साधु संत पहले से उज्जैन चले जाते हैं। जिसके चलते हरिद्वार अर्द्धकुंभ में संतों की भागेदारी नहीं होती और शाही स्नान की भी परंपरा नहीं है। जबकि प्रयाग अर्द्धकुंभ पूरी तरह संतों के हवाले रहता है। कुंभ की तरह कई शाही स्नान होते हैं। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरी एक वर्ष से प्रयासरत हैं कि हरिद्वार अर्द्धकुंभ को भी एक शाही स्नान महाशिवरात्रि पर मिल जाए। आरंभ में इसके लिए अखाड़ा परिषद श्रीमहंत ज्ञानदास तैयार नहीं थे। बाद में अखाड़ा परिषद दो फाड़ हो गई और नरेंद्र गिरी अध्यक्ष बन गए। नरेंद्र गिरी के नेतृत्व में दो संन्यासी अखाड़ों ने हरि गिरी के प्रयासों के प्रति रुचि नहीं दिखाई। इसके विपरीत श्रीमहंत ज्ञानदास ने यह कहकर सबको चोंका दिया कि वह नए सिर से नई परंपरा के बारे में सोच रहे हैं। हालांकि तीनों बैरागी अखाड़ों ने असहमति व्यक्त कर दी है। सात संन्यासी अखाड़ों की बीच भी प्रस्तावित स्नान को लेकर मतभेद उभर आए हैं। अत: अध्यक्ष और महामंत्री ने यह विचार त्याग दिया है।
हरिद्वार अर्द्धकुंभ मेला प्रशासन बार-बार पूछ रहा था कि किस तिथि पर अखाड़े नहाना चाहते हैं। अब अखाड़ा परिषद की ओर से मेला अधिष्ठान को स्पष्ट कर दिया है कि अखाड़ों का स्नान का इरादा नहीं है। बताया गया कि सभी अखाड़े जनवरी से उज्जैन पहुंचेंगे। परिणामस्वरूप हरिद्वार में संतों का स्नान नहीं हो पाएगा। श्रीमहंत हरि गिरी ने उन तीन अखाड़ों का भी अवगत करा दिया है जो एक स्नान की तैयारी हरिद्वार में कर रहे थे।