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एचआरडीए के अभियंता दबाए बैठे हैं 10 करोड़ आए के केस

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एचआरडीए के अभियंता शासन की एकमुश्त स्वैच्छिक शमन योजना के अंतर्गत आए लगभग 10 करोड़ के केसों को दबाए बैठें हैं। शासन ने आवासीय अवैध निर्माणों को कंपाउंड करने लिए स्वैच्छिक शमन योजना शुरू की थी।
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इस योजना के तहत हरिद्वार, रुड़की व लक्सर से एचआरडीए को 161 भवन स्वामियों के आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदन के साथ स्वैच्छिक शमन मूल्यांकन की 50 प्रतिशत शमन शुल्क धनराशि जमा कराने का प्रावधान था। इससे एचआरडीए को 31 दिसंबर तक 5 करोड़ 37 लाख रुपये से अधिक धनराशि प्राप्त हुई। यदि एचआरडीए प्राप्त आवेदनों की जांच कर निस्तारित करता तो उसको 10 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त होता, जिसका उपयोग शहर की सौंदर्यीकरण करने में किया जा सकता था। स्वैच्छिक शमन योजना में हरिद्वार से 130, रुड़की से 29 और लक्सर 2 आवेदन एचआरडीए को प्राप्त हुए थे। इनमें से मात्र 9 अभी तक स्वीकृत और 27 आवेदनों पर एचआरडीए ने आपत्ति लगाई। इस तरह 125 स्वैच्छिक शमन योजना के आवेदनों की फाइलों को एचआरडीए के अभियंताओं ने अभी तक दबा रखा है। अधिकारी शासन की स्वैच्छिक शमन योजना में रुचि दिखाते तो क्षेत्रवार कैंप लगाकर और अधिक आवेदन प्राप्त कर 50 करोड़ रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते थे, परंतु ऐसा नहीं किया गया है। एचआरडीए में अवैध निर्माणों की संख्या हजारों में हैं। अवैध निर्माण आर्थिक रूप से दोहन का माध्यम बने हुए हैं इसलिए कोई इस रास्ते को बंद करना नहीं चाहता है।
स्वैच्छिक शमन योजना में प्राप्त कंपाउंड मैप और आवेदन ऑनलाइन लिए गए थे। प्राप्त केसों की अभियंता स्तर से जांच कराई जाती है। त्रुटिपूर्ण आवेदन पर आपत्ति निस्तारण का अवसर आवेदक को दिया जाता है। यह सारी प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाती है। सभी अभियंताओं को अपने-अपने सर्किल के कंपाउंड मैप की जांच कर रिपोर्ट के साथ निस्तारित करने के लिए निर्देश दिया गया है। जल्दी ही प्राप्त सभी आवेदनों को निस्तारित कर दिया जाएगा।
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- हरबीर सिंह, सचिव एचआरडीए
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