गन्ना उत्पादन के बाद अब मशरूम उत्पादन में भी हरिद्वार ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। यहां रोजाना 80 क्विंटल मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं देहरादून में 50 और टिहरी में 30 क्विंटल उत्पादन किया जा रहा है।
जिले में 20 लोगों की ओर से मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। इनमें 11 मशरूम यूनिट तो बड़ी स्तर की हैं। इनमें औसतन रोजाना 65 क्विंटल मशरूम की पैदावार की जा रही है। कुल मिलाकर उत्पादन लगभग 80 क्विंटल होता है। इस मशरूम को दिल्ली की मंडी में भेजा जा रहा है। वहां से देश के विभिन्न महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक में मशरूम को सप्लाई किया जाता है। इससे मशरूम उत्पादन करने वालों को अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है। वहीं एक आंकड़े के अनुसार करीब सात सौ लोगों को इससे रोजगार मिला हुआ है।
थोक में सौ रुपये किलो तक दाम
उत्पादकों की ओर से अपनी यूनिटों से अधिक मशरूम को दिल्ली की थोक मंडी में भेजा जा रहा है। वहां से मशरूम के दाम सौ रुपये किलोग्राम तक मिल जा रहे हैं जबकि 60 रुपये किलोग्राम कम से कम दाम रहते हैं। फुटकर बाजार में ये दो सौ से ढाई सौ रुपये किलोग्राम बिकता है।
वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल है मशरूम
सरकार की ओर से मशरूम को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल किया गया है। इससे अधिकारियों का फोकस भी मशरूम की तरफ हुआ है। उद्यान अधिकारियों के अनुसार मशरूम का अधिक उत्पादन पिछले पांच साल में अधिक हुआ है। उनका कहना है कि मशरूम का उत्पादन पहले बहुत कम था लेकिन पिछले पांच सालों में लोगों का रुझान बढ़ा है। आज मशरूम उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मशरूम यूनिट लगाने के लिए लोग आवेदन करने और जानकारी लेने के लिए आ रहे हैं।
घाड़ क्षेत्र के लिए मुफीद
घाड़ क्षेत्र के लोगों के लिए मशरूम उत्पादन बड़ा मुफीद बना हुआ है। दरअसल, घाड़ क्षेत्र में जंगली जानवरों से किसान काफी परेशान थे इससे कभी-कभी घाड़ क्षेत्र में जहां फसलों के उत्पादन पर संकट बना रहता था। वहां भी तीन यूनिटों समेत झोपड़ीनुमा स्थान बनाकर मशरूम उत्पादन कर अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा रहा है।
सरकार की ओर से मशरूम के प्रति लोगों का रुझान बढ़ाने के लिए अनुदान देने की व्यवस्था भी की गई है। इसमें मशरूम यूनिट लगाने के लिए 40 फीसदी की छूट दी जा रही है। एक स्टेंडर्ड यूनिट लगाने के लिए बीस लाख का प्रोजेक्ट रखा गया है। इसमें आठ लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
-ओमप्रकाश सिंह, अपर उद्यान अधिकारी, हरिद्वार