अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा देश भर के तीर्थों पर फैली पुरोहितों की समस्याओं पर विचार करेगी। तीर्थत्व एवं मर्यादाओं से जुड़े प्रश्नों पर अहम निर्णय लिए जाएंगे। महासभा का राष्ट्रीय सम्मेलन 17 दिसंबर से हरिद्वार मेें शुरू हो रहा है। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री हरीश रावत करेंगे।
अखिल भारतीय महासभा के महामंत्री श्रीकांत वशिष्ठ ने शनिवार को गंगा सभा कार्यालय में यह जानकारी पत्रकारों को दी। बताया कि देश के सभी तीर्थों के पुरोहितों को शामिल कर अखिल भारतीय महासभा का गठन दशकों पहले किया गया था। इस बार विशेष सम्मेलन का आयोजन 17-18 दिसंबर को हरिद्वार में होगा। सम्मेलन में देश के विभिन्न तीर्थों से आए करीब 500 प्रतिनिधि भाग लेंगे। दक्षिण भारत के रामेश्वरम, पश्चिमी भारत के द्वारिका, पूर्वोत्तर के गंगा सागर और जगन्नाथ पुरी आदि तीर्थों से पुरोहितों का आगमन 15 दिसंबर से होगा। सम्मेलन के लिए सभी तीर्थ पुरोहितों की ओर से भेजे गए सुझावों के आधार पर एजेंडा तैयार किया गया है। श्रीकांत वशिष्ठ ने बताया कि हरिद्वार सम्मेलन का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि वर्ष 1975 में महासभा की स्थापना हरिद्वार में ही हुई थी। पिछले कुछ समय से अनेक तीर्थों पर पुरोहितों से जुड़ी कई समस्याएं हैं, जिनका संबंध राज्य सरकारों के साथ साथ केंद्र सरकार से भी है।
बदरीनाथ सम्मेलन में मांग की गई थी कि पुरोहितों के प्रतिनिधियों को राज्य सभा के साथ- साथ विधान परिषदों में भी स्थान दिया जाए। इसका उद्देश्य तीर्थों का समुचित विकास करना है। तीर्थों पर मूल समस्या तीर्थत्व को लेकर खड़ी हुई है। अनेक मर्यादाएं शासन की ओर से तोड़ी जा रही हैं। इन सब पर हरिद्वार सम्मेलन में गहन विचार विमर्श होगा।