हरिद्वार। मोदी सरकार की स्वच्छ (क्लीन) गंगा में अर्द्घकुंभ 2016 का स्नान कराने के दावे हवा हवाई साबित हुए हैं। गंगा बंदी के दौरान गंगाजी में गिरने वाले एक भी गंदे नाले को टेप नहीं किया गया। श्रद्घालुओं को गंगाजी बहते गंदे नालों के दूषित जल से ही स्नान करना पड़ेगा।
केंद्रीय जल संस्थान एवं गंगा मामलों की मंत्री उमा भारती ने धर्मनगरी में एक से अधिक बार अपनी प्रेस वार्ताओं में नमामि गंगे की योजनाओं की जानकारी देते हुए अर्द्घकुंभ का स्नान क्लीन गंगा में कराने का दावा किया था। गंगाजी को दूषित होने से रोकने के लिए अस्थायी और स्थायी योजनाओं को कागजों पर तैयार करने का काम ही हुआ। जाहिर है कि गंगाजी को स्वच्छ तथा निर्मल बनाने की करोड़ों रुपये लागत की परियोजनाएं फाइलों की शोभा बढ़ा रही हैं और अर्द्घकुंभ स्नान को आने वाले श्रद्घालुओं को गंदगी से दूषित जल में ही डुबकी लगानी पड़ेगी।
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अर्द्घकुंभ के लिए यह थी योजना
अर्द्घकुंभ का स्नान स्वच्छ गंगाजी में कराने के उद्देश्य से उत्तराखंड पेयजल निर्माण निगम की निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई ने 8 महीने की अस्थायी योजना तैयार कर लगभग 2 करोड़ रुपये लागत का प्रस्ताव मेलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा था, परंतु किसी ने कुछ नहीं किया। गंगाजी में गिरते गंदे नालों का अस्थायी रूप से नालों के अंदर ही केमिकल डालकर ट्रीटमेंट करने की योजना थी, जिसे बायोरेमीडियल कहा जाता है। लेकिन इस अस्थायी योजना को भी स्वीकृति नहीं मिली है। यदि इस अस्थायी परियोजनाओं को स्वीकार कर धनराशि अवमुक्त की जाती तो गंगाजी ट्रीटमेंट किया हुआ पानी ही जाता।
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अर्द्घकुंभ मेला अवधि के लिए गंदे नालों का ट्रीटमेंट करने की योजना बनाई थी। लगभग 2 करोड़ रुपये लागत की 8 महीने की योजना का प्रस्ताव मेलाधिकारी और शासन को भेजा था, लेकिन अभी तक योजना स्वीकृति नहीं हुई है। नमामि गंगे योजना में गंगाजी में गिर रहे नालों को टेप करने, पंपिंग स्टेशनों के मरम्मत को लेकर 266 करोड़ रुपये लागत की डीपीआर राज्य शासन के माध्यम से केंद्र को अक्तूबर में भेज दी गई थी, परंतु अभी तक स्थायी-अस्थायी योजनाओं पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है।
- वाईके मिश्रा, महाप्रबंधक, निर्माण मंडल (गंगा )।