उत्तराखंड संस्कृत विवि की और से आयोजित गोष्ठी में भाग लेते छात्र साथ में शिक्षक।
- फोटो : HARIDWAR
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित वेब गोष्ठी में हिमवंत कवि चंद्र कुवंर बर्त्वाल को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी साहित्य में बर्त्वाल के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।
विश्वविद्यालय के आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय में हिमवंत कवि चंद्र कुवंर बर्त्वाल जयंती पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय वेब गोष्ठी में प्रथम वक्ता के रूप में नार्वे से प्रसिद्ध साहित्यकार सुरेश चंद शुक्ल ने हिंदी नाटकों में सांस्कृतिक चेतना विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जयशंकर प्रसाद, शंकर शेष, नरेश मेहता आदि नाटककारों के नाटकों में सांस्कृतिक चेतना पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सोफिया विवि बुल्गारिया के प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने सांस्कृतिक चेतना और आधुनिक साहित्य विषय पर अपने विचार रखे। डॉ. राम प्रसाद भट्ट (जर्मनी) ने कहा कि बर्त्वाल हिंदी साहित्य में जाना पहचाना नाम है। सागर विवि से डा आनंद प्रकाश त्रिपाठी ने हिंदी उपन्यासों में सांस्कृतिक चेतना विषय पर वक्तव्य दिया। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संकाय अध्यक्ष प्रो. दिनेश चमोला ने बताया कि गोष्ठी में 132 से अधिक शिक्षक एवं शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया।