मायापुर में हाईवे चौड़ीकरण में फंसा अड़ंगा खत्म हो गया है। इस जगह पर एलीवेटेड फ्लाईओवर बनाया जाएगा। नहर और न्यू मायापुर चैनल के साथ बिना छेड़छाड़ के नहर ऊपर फ्लाईओवर बनाने पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग राजी हो गया है।
मायापुर में हाईवे चौड़ीकरण का कार्य कई सालों से अटका हुआ है। इस जगह पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की तरफ से एनओसी नहीं मिल रही थी। एनएचएआई को एनओसी प्राप्त करने के लिए फ्लाईओवर निर्माण का तीसरा प्रपोजल बनाना पड़ा है। इससे पूर्व यूपी को दो डिजायन दिए गए थे, लेकिन एक डिजायन की जगह पर तो सिंचाई विभाग ने मायापुर न्यू चैनल का निर्माण करा दिया है। इसके बाद दूसरा डिजायन डामकोठी के सामने सिंचाई विभाग की आवासीय कालोनी से पुल बनाकर केशव आश्रम से सड़क निकालनी थी। यहां भी सिंचाई विभाग ने अपने कर्मचारियों की कालोनी से हाईवे निकालने की एनओसी देने से मना कर दिया था। इसके बाद एनएचएआई और कार्यदायी संस्था एरा के इंजीनियरों ने मायापुर में अटके हाईवे को पार लगाने का तीसरे विकल्प के रूप में एलीवेटेड फ्लाईओवर बनाना का रास्ता निकाला है। इसके लिए शंकराचार्य चौक के पास से अलकनंदा होटल तक 16 पिलर खड़े किए जाएंगे। जिन पर फोरलेन बनेगा। इसके नीचे अभी तो सड़क, पुल और यूपी का मायापुर चैनल ज्यों का त्यों रहेगा।
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अफसरों ने किया स्थलीय निरीक्षण
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के नए व तीसरे प्रपोजल का सोमवार को यूपी गंगा कैनाल मेरठ मंडल के मुख्य अभियंता एसके शर्मा ने अन्य अधीनस्थ अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक प्रदीप सिंह गुसाईं, टीम लीडर कर्नल एसके चावला, कार्यदायी संस्था एरा के महाप्रबंधक नरेंद्र शर्मा आदि अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण किया। एरा के परियोजना प्रबंधक बीबी सिंह ने बताया कि यूपी के चीफ इंजीनियर ने निरीक्षण के बाद प्राइमरी एप्रुवल दे दी है। अब एनएचएआई को फाइनल ड्राइंग को प्रस्तुत किया जाना है। इसके बाद लिखित एनओसी प्राप्त हो जाएगी। यूपी के साथ सहमति बनने से एनएचएआई व कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने राहत की सांस ली हैं।
ग्रामीणों ने नहीं बनाने दी सड़क
ग्रामीणों ने पथरी व बहादराबाद जंक्शन के बीच सुबह सड़क पर डामर का काम नहीं करने दिया। परियोजना प्रबंधक बीबी सिंह ने बताया कि सोमवार की रात में जेबर लगाकर सफाई का काम करा दिया गया था। मंगलवार को सुबह सड़क पर डामर का काम कंपलीट किया जाना था, परंतु ग्रामीणों ने मौके पर आकर काम नहीं करने दिया है। उनका कहना है कि जब तक उनका मुआवजे का विवाद नहीं निपटता है तब काम नहीं होने दिया गया है।