हरिद्वार। राजाजी टाइगर रिजर्व की रेंज में मनसा देवी मंदिर मार्ग पर अवैध दुकानों का बड़ा खेल सामने आया है। आरोप है कि ये दुकानें मोटी रकम लेकर लगवाई गई थीं। बड़े स्थानों के लिए एकमुश्त 50 हजार और हर महीने दो हजार रुपये की वसूली की जा रही थी। यह रकम पार्क के कुछ कर्मचारियों की ओर से ली जाती थी। इस गोरखधंधे का खुलासा खुद दुकानदारों ने नाम और पहचान उजागर न करने की शर्त पर किया है। उन्होंने बताया कि चंडी देवी मंदिर मार्ग और आसपास भी ऐसी ही स्थिति है। अब पूरा मामला सामने आने के बाद राजाजी पार्क प्रशासन सवालों के घेरे में है।मनसा देवी मंदिर मार्ग पर हाल में हुई भगदड़ की घटना के बाद अब नए-नए चौंकाने वाले मामलों की परत दर परत खुलने लगीं। मार्ग पर अतिक्रमण और अवैध दुकानें सामने आ रही थीं। इसकी सच्चाई जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने मनसा देवी मंदिर मार्ग पर पड़ताल की। अधिकांश दुकानें तो बंद मिलीं, लेकिन दुकान चलाने वाले कुछ लोग मिले। जब उन्हें विश्वास में लेकर बातचीत की गई तो एक के बाद एक राज खुलने लगे। नाम और पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर दुकान लगाने वाले व्यक्ति ने बताया कि बड़े स्थान पर दुकान के लिए शुरुआत में उन्होंने 50 हजार रुपये दे दिए थे, लेकिन अब हर महीने दो हजार रुपये उनसे वसूले जाते थे। यह रकम राजाजी पार्क के कर्मचारियों को दी जाती थी। रकम ऊपर तक जाती है।
दूसरे दुकानदार ने बताया कि छोटी सी दुकान के लिए उन्होंने शुरुआत में पहले 15 हजार रुपये एकमुश्त दिए थे। अब इस जगह की एवज में हर महीने एक हजार रुपये अदा करते थे। तीसरे ने कहा कि यहां जैसी जगह होती है, उसी के अनुसार किराया फिक्स है। छोटी या बड़ी जगह के अनुरूप ही पैसे तय है। चौथे दुकानदार ने बताया कि उनके परिचित चंडी देवी मंदिर मार्ग पर दुकान लगाते हैं। वहां भी वन विभाग के कर्मचारियों को पैसे देते हैं। कहता है कि ऐसे कौन दुकान लगने देगा। पैसे नहीं देंगे तो दुकानें हटवा दी जाएंगी।
मंदिर परिसर में दुकानों के अलग रेट
मार्ग पर ही दुकान लगवाने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि मनसा देवी मंदिर परिसर में बनी दुकानों का रेट अलग है। कुछ पुजारी दुकानों का शुरुआत में शुल्क लेते हैं। करीब दो लाख तक सालाना दिया जाता है। इसके बाद फिर राजाजी पार्क के कर्मचारियों को शुल्क दिया जाता है। इसमें 1500 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक है।