फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हरिद्वार ने छुआ सफलता का अर्श

Tue, 08 Nov 2016 10:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
विज्ञापन
विज्ञापन
राज्य के 16 साल की सफलता के सफर का असर हरिद्वार में साफ नजर आता है। हरिद्वार की पहचान राज्य बनने से पहले अध्यात्मिक तीर्थ, भेल के कारण एक औद्योगिक प्रतिष्ठान के रूप में थी लेकिन, उत्तराखंड बनने के बाद से हरिद्वार देश और दुनिया के नक्शे पर बड़े औद्योगिक हब के रूप में उभरकर सामने आया है। जिले में इस समय एक हजार से ज्यादा औद्योगिक इकाईयां हैं। इनमें हजारों बेरोजगारों को काम मिला है।
विज्ञापन


राजनीतिक, शैक्षिक और तीर्थनगरी के रूप में भी हरिद्वार ने विकास के कई आयाम छुए हैं। नौ नवंबर 2000 को जिस समय नवोदित उत्तरांचल का गठन हुआ था उस समय दो विपरीत धाराएं हरिद्वार में सक्रिय थी। एक बड़ा वर्ग हरिद्वार को उत्तरांचल में मिलाने के लिए संघर्षरत था। दूसरी बड़ी आबादी हरिद्वार को उत्तर प्रदेश में ही शामिल करने के लिए ‘हरिद्वार बचाओ आंदोलन’ का हिस्सा बनी थी। प्रतिदिन धरने प्रदर्शन और संघर्ष सड़कों पर नजर आता था लेकिन, हरिद्वार जब उत्तरांचल का हिस्सा बना और एनडी तिवारी के नेतृत्व में पहली निर्वाचित सरकार बनी तो हरिद्वार की कायाकल्प ही हो गई। रोशनाबाद के जिस इलाके में कोई भी फसल नहीं उगती थी उसका सदुपयोग औद्योगिक इकाईयां लगाने के लिए किया गया। अब वहां गाड़ियां, दवाएं, घरेलू उत्पाद समेत मानवीय जरूरत की हर चीज का उत्पादन हो रहा है। सड़कों और पुलों का जाल बिछ गया है। देहात में डिग्री कालेज और तकनीकी शिक्षा के संस्थान विकास की गाथा खुद-ब-खुद कह रहे हैं। शैक्षिक स्तर भी बढ़ा है। सही मायने में जनपद हरिद्वार ने उत्तराखंड के 16 साल के सफर में विकास के कई आयाम छुए हैं।

पुलों के रास्ते घाड़ में पहुंचा विकास हरिद्वार, रोशनाबाद, धनौरी, रुड़की, भगवानपुर तक फैल गया। इससे घाड़ क्षेत्र काफी बदला-बदला नजर आने लगा है। एक जमाना था जब बरसात होते ही करीब सौ से ज्यादा गांव का संपर्क देश और दुनिया से कट जाता था। कोई रास्ता न होने, रपटों पर पुल न होने के कारण लाखों की आबादी घरों में कैद हो जाती थी। बीमार होने पर अस्पताल तक पहुंचना भी मुश्किल होता था लेकिन, वक्त ने करवट बदली तो अब यहां नदियों के रपटों पर पुलों का जाल बिछ गया है। भगवानपुर से लेकर रोशनाबाद तक घाड़ में 12 पुल बन चुके हैं। इनमें से कुछ पर काम जारी है। टीराहजारा, टोगियां, ढालूवाला, शाह मंसूर, बुग्गावाला आदि के क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी गाड़ियां फर्राटा भरकर दौड़ रही हैं। जमीनों के भाव भी यहां आसमान छूने लगे हैं। जहां अपने रिश्तेदार भी आने से कतराते थे वहां दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा आदि के लोगों ने फार्म हाउस बनाने के लिए जमीन खरीद ली है। यहां नया औद्योगिक क्षेत्र बनाने का भी प्रस्ताव है।
विज्ञापन


राज्य बनने से पहले विधानसभा की तीन सीट हरिद्वार, लक्सर एवं रुड़की हुआ करती थी। लेकिन इस समय इनकी संख्या 11 है। राजनीतिक विस्तार हुआ तो नेताओं की संख्या भी बढ़ी। इस समय हर दलों के नेता गली-गली और घर-घर नजर आते हैं।

विकास के लिए सहयोग जरूरी
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि राज्य स्थापना के 16 साल बाद सफलता के ट्रैक पर पूरी तरह सही दिशा में चल रहा है। अभी कुछ चुनौतियां हैं उन्हें भी दूर किया जाएगा। विकास के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें