पतंजलि गुरुकुलम के नवीन परिसर का शनिवार को भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया गया। कार्ष्णी पीठाधीश्वर स्वामी शरणानंद ने भवन का का शिलान्यास किया।
योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि लगभग 500 करोड़ की लागत से बन रहे भवन में भारत के गौरवशाली इतिहास और गुरुकुल परंपरा के दर्शन होंगे। उन्होंने कहा कि जहां एक ओर दिव्यता होगी तो दूसरी और भव्यता। उन्होंने कहा कि पतंजलि गुरुकुलम का उद्देश्य दिव्य व भव्य व्यक्तित्व निर्माण करना है। वैदिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा व भारतीय मूल्यों का ज्ञान भी छात्र-छात्रओं को प्रदान किया जाएगा।
कार्ष्णी पीठाधीश्वर स्वामी शरणानंद ने कहा कि संस्कृति के विद्यार्थी अक्सर हीन भावना रखते हैं। लेकिन छात्रों को स्वयं में गौरव की अनुभूति रखना चाहिए, क्योंकि वो सरस्वती के वरद पुत्र हैं। उन्होंने कहा कि इस धरा को बैकुंठ बनाने की क्षमता मात्र नारी में ही है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों को वैदिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए गुरुकुलम भेजा है, उनका बड़ा दिल है। यहां से अष्टाध्यायी, धातुपाठ, पंचोपदेश, वेद, उपनिषद् आदि का ज्ञान प्राप्त कर ये बच्चे देश-विदेश में भारतीय ऋषि परंपरा की पताका फहराएंगे।
जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि पतंजलि गुरुकुलम की स्थापना से भारतीय परंपराओं व ऋषि संस्कृति को गौरव मिलेगा। राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य गोविंददेव गिरि ने कहा कि संयमित जीवन व आध्यात्मिक दृष्टिकोण ही सफल जीवन का मार्ग है। इस दौरान ऋतंभरा, स्वामी प्रेम विवेकानंद, मनोजमणि त्रिपाठी, भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एनपी सिंह, पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. महावीर, कुलानुशासिका आचार्या साध्वी देवप्रिया, मुख्य महाप्रबंधक ललित मोहन आदि मौजूद रहे।
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हेलीकाप्टर दुर्घटना में साजिश की आशंका
हरिद्वार। स्वामी रामदेव ने देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत के हेलीकाप्टर दुर्घटना पर साजिश की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच जरूरी है। उन्होंने सीडीएस बिपिन रावत को मरणोपरांत भारत रत्न पुरस्कार प्रदान करने की मांग की।
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बच्चों का शास्त्र ज्ञान देख हैरत में पड़े स्वामी शरणानंद
कार्ष्णी पीठाधीश्वर स्वामी शरणानंद बच्चों का शास्त्र ज्ञान देखकर हैरत में पड़ गए। 3 से 5 साल के बच्चों को गीता, पंचोपदेश, अष्टाध्यायी, धातुपाठ, लिंगानुशासन कंठस्थ थे। स्वामी शरणानंद ने कहा कि 500 से 1000 सूत्र एक दिन में कंठस्थ करना ओलंपिक मेडल प्राप्त करने से भी बड़ी बात है।