उत्तरी हरिद्वार स्थित गायत्री विहार कालोनी में भुवनेश्वरी मंदिर में सोमवार की तड़के चार बजे एक गुलदार आवासीय परिसर के बाथरूम मेें घुस गया। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद वन विभाग के कर्मचारियों और आसपास के लोगों की मदद से गुलदार को पिंजरे में कैद कर चिडिय़ापुर रेस्क्यू सेंटर ले जाया गया। मंदिर परिसर में रहने वाले लोग कई घंटे तक दहशत में रहे।
शांतिकुंज के गेट नंबर चार के सामने स्थित गायत्री विहार कालोनी में भुवनेश्वरी मंदिर के नाम से एक आध्यात्मिक संस्था है। जिसके एक हिस्से में मंदिर और दूसरे हिस्से में आवास बने हैं। सुबह करीब चार बजे तीन गुलदार यज्ञशाला के आसपास चहल कदमी कर रहे थे। जैसे ही दिन निकलने पर आवाजाही शुरू हुई तो उनमें एक गुलदार जंगल की तरफ भाग गया। जबकि दो गुलदार दीवार के सहारे भुवनेश्वरी मंदिर परिसर में बने यज्ञशाला की छत पर पहुंच गए। कुछ देर बाद मंदिर के संचालक पंडित भास्कर प्रसाद लघु शंका के लिए उठे तो उनकी नजर यज्ञशाला की छत के पास बैठे दो गुलदार पर पड़ी तो वह शोर मचाते हुए उल्टे पांव कमरे की तरफ दौड़े। आवाज सुनकर उनका बेटा प्रभाकर, भतीजा शशांक शर्मा, मोहित भट्ट, भाई कविराज, पड़ोसी श्याम कृष्ण आदि दौड़े।
प्रभाकर के अनुसार उन्होंने पहले डंडा दिखाकर और पटाखे छोड़कर गुलदार को भगाने का प्रयास किया। जिस पर एक गुलदार भाग गया। जबकि दूसरा बाथरूम में घुस गया। प्रभाकर ने हिम्मत दिखाते हुए बाथरूम का दरवाजा बंद किया। तब तक आस पास के लोग भी जमा हो गए। लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम और वन विभाग के क्षेत्राधिकारी महेश प्रसाद सेमवाल को फोन पर जानकारी दी।
कुछ देर में ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और गुलदार को पिंजरे में पकड़ने का प्रयास शुरू हो गया। करीब साढ़े आठ बजे क्षेत्र में रहने वाले देवेश कुमार की मदद से दरवाजा काटकर गुलदार को वनकर्मियों ने पिंजरे में कैद किया। वन दारोगा ओपी सिंह ने बताया कि पकड़ा गया गुलदार चार साल का नर है, जिसे चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर में भिजवाया गया है।
कई घंटे तक अटकी रही सांसें
गुलदार को पकड़वाने में अहम भूमिका निभाने वाले पंडित भास्कर प्रसाद के बेटे प्रभाकर प्रसाद का कहना है कि जब पिता जी ने गुलदार को देखा और शोर मचाया तो वह और अन्य परिजन घर में सो रहे थे। उन्होंने जैसे तैसे हिम्मत दिखाकर बाथरूम का दरवाजा बंद किया। इस दौरान कई घंटे लोगों की सांसे अटकी रही।