गंगा रक्षा के लिए आंदोलित मातृसदन ने नई सरकार को नसीहत दी है कि वह गंगा की तरफ बुरी नजर न डाले। मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद महाराज ने दावा किया कि मोक्षदायिनी गंगा की अवमानना से ही हरीश रावत सरकार की बुरी तरह पराजय हुई है।
बीती सरकार के समय मातृसदन को गंगा में अवैध खनन के खिलाफ कई बार तप/अनशन किया। हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट सहित एनजीटी व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्पष्ट आदेशों के बावजूद गंगा में खनन और क्रशरों पर कार्रवाई न होने पर मातृसदन ने समय- समय पर जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार के मुखिया को कटघरे में खड़ा किया। बीते साल ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद के एक माह के अनशन के बाद भी कार्रवाई न होने पर स्वामी शिवानंद को राष्ट्रपति को 225 पेज की चिट्ठी भेजकर इच्छा मृत्यु मांगनी पड़ी।
बुधवार को मातृ सदन में पत्रकार वार्ता में स्वामी शिवानंद ने हरीश रावत के मुख्यमंत्रित्वकाल में माफियाराज के आरोप दोहराए। े कहा कि गंगा का सीना लगातार छलनी होता रहा। सारे बाग कट गए और द्वीप नष्ट हो गए। हरीश रावत के साथ- साथ खनन माफिया से सांठगांठ करने वाले उनके मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी, नवप्रभात और दिनेश चंद्र अग्रवाल भी अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए। स्वामी शिवानंद ने कहा कि भाजपा यह न सोचे की पूर्ण बहुमत मिल गया तो जो चाहे करेंगे।
उन्होंने गंगा की प्रसिद्ध सूक्ति का हवाला देते हुए कहा कि गंगा की रेती, लेती न देती। आने वाली सरकार को चाहिए कि एनजीटी के आदेशों और सीपीसीबी की ओर से लागू ईपी एक्ट पांच का पालन कराते हुए गंगा रक्षा का कार्य करे। हरीश रावत को हराने वाले स्वामी यतीश्वरानंद को भी नसीहत देने से स्वामी शिवानंद नहीं चूके। कहा कि उनकी छवि भी मेरी नजर में ज्यादा बेहतर नहीं है। स्वामी यतीश्वरानंद खनन माफिया से दूर रहें।
नमामि गंगे पर करोड़ों खर्च, नतीजा शून्य
स्वामी शिवानंद ने केंद्र सरकार की नमामि गंगा योजना पर भी सवाल उठाए। कहा कि हजारों करोड़ की योजना बनाई जा रही है, पर धरातल पर कहीं कोई काम नहीं हो रहा है। गंगा रक्षा को लेकर आने वाली भाजपा सरकार से उम्मीदों के बारे में पूछने पर स्वामी शिवानंद का कहना था कि उम्मीदें किसी से नहीं है। वह कांग्रेस सरकार के मुखिया और उनके साथियों का हश्र याद रखे।