दूध बेचने के लिए अब किसानों को लाइन में लगकर घंटो अपनी बारी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। डेयरी विकास विभाग की ओर से जिले में 100 कंप्यूटराइज्ड मिल्क कलेक्शन यूनिट लगाने जा रहा है। इस यूनिट पर किसान को दूध का वजन, फेट और मूल्य की पर्ची 20 सेकेंड में मिलेगी।
इस समय दूध बेचने के लिए किसानों को जिला डेयरी विकास विभाग की ओर से संचालित 202 सहकारी समितियों पर जाना पड़ता है। लेकिन इन पर दूध की जांच की विधि बहुत पुरानी है। इस विधि के तहत करीब पांच-सात ग्राम दूध में दो-तीन बूंद तेजाब की मिलाई जाती है। जिसके चलते कई बार जल्दी के चक्कर और भीड़भाड़ के चलते तेजाब कर्मियों और किसानों के हाथों आदि पर गिर जाता है। कई बार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इस विधि से एक विक्रेता के दूध की जांच में 20 मिनट से भी अधिक समय लगता है। लेकिन अब इस पुरानी विधि से किसानों को छुटकारा मिलने जा रहा है।
इस संबंध में जिला डेयरी विकास विभाग के सहायक निदेशक वीके गुप्ता ने बताया कि जल्द विभाग जिले में 100 कंप्यूटराइज्ड मिल्क कलेक्शन यूनिट लगाने जा रहा है। जून-जुलाई तक काम शुरू होने की उम्मीद है। इस यूनिट की खासियत होगी की केवल 20 सेकेंड में दूध का वजन, फेट और कीमत की पर्ची किसान को मिलेगी। एक यूनिट लगाने में मात्र 73 हजार रुपये खर्च आएगा। इससे किसानों का बहुत समय बचेगा।
शहर में खुलेंगे 15 मिल्क पार्लर
अर्द्धकुंभ को देखते हुए डेयरी विकास विभाग शहर में 15 मिल्क पार्लर भी खोलेगा। इन पार्लर पर केवल आंचल का दूध मिलेगा। दही, मक्खन, मट्ठा और घी भी उपलब्ध रहेगा।
खरीदा जा रहा 13 हजार लीटर दूध
विभाग को फिलहाल जिले में स्थापित 202 सहकारी समितियों से 13 हजार लीटर दूध रोजाना मिलता है। सभी केंद्रों पर विभाग की गाड़ियां दूध लेने पहुंचती हैं। इसके बाद लक्सर ब्लॉक के लंढौरा, शिकारपुर गांव स्थित प्लांटों में भेजा जाता है। वहां से शहर के सभी केंद्रों पर इसे सप्लाई किया जाता है।