उत्तराखंड संस्कृत अकादमी में आयोजित कार्यक्रम में संबोधित करते वक्ता ।
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उत्तराखंड संस्कृत अकादमी की ओर से संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए चल रहा श्रीम्दभागवत गीता मास महोत्सव का समापन समारोह में मुख्य अतिथि संस्कृत शिक्षा के संयुक्त सचिव वीरेंद्र पाल ने कहा कि गीता स्वयं में ही परिपूर्ण है। सभी विकारों को समाप्त करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान का भंडार है।
उन्होंने कहा कि जन मानस की समस्या का समाधान शासन की ओर से बनाए गए नियमों के अनुसार किया जाएगा। समस्त संस्कृत अनुरागी अपने कर्म करें तो फल भी मिलेगा। समस्त संस्कृत शिक्षा मिलकर समाजोपयोगी पाठ्यक्रम का निर्माण करें। अध्यक्षता करते हुए संस्कृत शिक्षा के अपर सचिव एवं अकादमी के सचिव रमेश कुमार ने कहा कि भागवत गीता ज्ञान का भंडार है। ज्ञान सभी में निहित है और कर्म ही सर्वोच्च है। निदेशक शिव प्रसाद खाली ने कहा कि गीता मानव जीवन को व्यवस्थित करने वाला शास्त्र है। मुख्य वक्ता पंडित ब्रहराम हरितोश ने कहा कि कलयुग में सरलता पूर्वक मुक्ति को प्राप्त करने के लिए एक ही शास्त्र है और वो है श्रीमद्भगवत गीता। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने कहा कि गीता कर्तव्य मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। बुराइयों पर विजयी के लिए गीता की आवश्यकता है। इस मौके पर सहायक निदेशक डा. वाजश्रवा आर्य, अकादमी के शोध अधिकारी डा. हरीशचंद्र गुरूरानी, लीला रावत, राधेश्याम, डा. अनिल कुमार त्रिपाठी, वेणीप्रसाद, डा. प्रकाश जोशी, डा. नवीन पंत, आकाश ममगांई आदि मौजूद रहे।