गंगासभा के चुनाव हुए सौ दिन पूरे होने को हैं लेकिन नए पदाधिकारी आज तक
नहीं बता पाए कि सभा के पास कितना सोना और चांदी है। काफी उठा-पटक के बाद
इसके चुनाव सात फरवरी-2015 को हुए थे। उस समय सोना-चांदी का मामला प्रमुख
मुद्दा बना था।
गौरतलब है कि नए महामंत्री रामकुमार मिश्रा का चुनाव
में सबसे बड़ा मुद्दा कोष में जमा सोना-चांदी ही था। वह पिछले 10 वर्ष से
भी पूर्व महामंत्रियों व कोषाध्यक्षों के खिलाफ लिखित अभियान चलाते रहे
हैं। कई बार उन्होंने सार्वजनिक जगहों पर पोस्टर लगाकर पूर्व पदाधिकारियों
को सोने-चांदी की जानकारी नहीं देने पर भी घेरा। लेकिन वे भी आज तक प्रधान
सभा अथवा कार्यकारिणी को सोने-चांदी का हिसाब नहीं बता पाए।
अध्यक्ष और
महामंत्री को पूर्व पदाधिकारियों की भांति कार्यकारिणी के गठन में भी
नाराजगी का सामना करना पड़ा। इस गठन से मिश्रा गुट के कई वरिष्ठ नेता उनसे
नाराज हुए। कुछ पदाधिकारियों ने त्यागपत्र भी दिए। इन सौ दिनों में नई
कार्यकारिणी कुछ भी नया नहीं कर पाई।
पुरोहितों की महती सभा की निगाह लंबे
अरसे से सोने-चांदी पर लगी हुई है। यह सामान सभा के लॉकरों मेें हैं अथवा
किसी के घर में रखा है, यह जानकारी भी नई टीम पुरोहित समाज को नहीं दे पाई।
पुरोहितों की नाराजगी के चलते नई सभा में कई संकट खड़े हो गए हैं।
इनका कहना है
यह
बात ठीक है कि हमने सभा के सोने-चांदी का सवाल बार-बार उठाया। पूर्व
पदाधिकारियों द्वारा जानकारी देने में देर करने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं
हो पा रही। बहुत सी फाइलें आज भी पूर्व पदाधिकारियों ने नए पदाधिकारियों
को बार-बार मांगने के बावजूद नहीं सौंपी। हजारों पुरोहित जानना चाहते हैं
कि सभा के पास सोने-चांदी के रूप में क्या है। आने वाले दिनों में समस्त
सदस्यों को जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।
- रामकुमार मिश्रा, महामंत्री, गंगा सभा।