हरिद्वार। वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही ब्रह्मलोक में राधा-कृष्ण के महारास से मां गंगा का जन्म हुआ था। आज के ही दिन भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर गंगा शिव की जटाओं में समाई थी। लिहाजा, गंगोत्री से गंगा सागर तक पूरा देश आज मां गंगा का जन्मोत्सव मना रहा है।
ब्रह्मलोक में इसी सप्तमी को रास करते राधा-कृष्ण इतने लीन हो गए कि दोनों मिलकर जल बन गए। उसी जल को ब्रह्मा ने अपने कमंडल में जगह दी। स्वर्ग लोक में बह रही गंगा मां भी राजा भगीरथ के तप से वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही प्रसन्न हुई। दिए गए वरदान के अनुसार वह धरती पर आने के लिए तैयार हो गई तो धरती कांप उठी कि गंगा के वेग से मैं पाताल में चली जाएंगी। तब भगीरथ ने भोलेनाथ शिव को मनाया और गंगा सप्तमी के दिन गंगा शिव जटाओं में समा गई। इसके बाद कैलाश से बहते हुए वह फिर धराधाम पर आई।
गुरुवार को पूरा देश मां गंगा का जन्मोत्सव मनाएगा। हरिद्वार, काशी, प्रयाग, गंगा सागर आदि तीर्थों पर लोग गंगा तटों पर उमड़ पड़ेंगे। पुरोहित दिन भर गंगा लहरी गाकर मां गंगा का जयघोष करेंगे तो साधु-संत गंगा स्तोत्र द्वारा मां की आराधना करेंगे। हरिद्वार धर्मनगरी तो इस मौके पर गंगामयी हो जाएगी।
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