From time immemorial, the wondrous power of mantras
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प्रभु कृपा निवारण दुख निवारण समागम में द्वारिका एवं ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज की उपस्थिति में 13 अखाड़ों के संत, महंत, महामंडलेश्वर सहित भारत साधु समाज के पदाधिकारी शामिल हुए। सभी संतों ने कुमार स्वामी के द्वारा प्रदान किए जाने वाले बीज मंत्रों और विशेष रूप से हनुमान कवच की सार्थकता का समर्थन किया। इस मौके पर प्रवचन करते हुए महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने कहा कि मंत्रों की शक्ति अनादिकाल से चमत्कारिक परिणाम दायिनी रही है।
हरिद्वार के कुछ संत शंकराचार्य को कुमार स्वामी के समागम के मंच पर जाने का विरोध जता रहे थे, लेकिन हरिराम इंटर कालेज में आयोजित समागम में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज समागम में पहुंचे। शंकराचार्य महाराज ने उनके बीज मंत्रों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीजमंत्रों के माध्यम से जन-जन का दुख निवारण कर रहे हैं।
महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी ने समागम में पहुंचे श्रद्घालुओं को बीजमंत्रों का अनुसरण कराया। उन्होंने कहा कि मंत्रों की शक्ति अनादिकाल से चमत्कारिक परिणाम दायिनी रही है, लेकिन भौतिक युग में व्यक्ति संस्कृति को भुला रहा है। उन्होंने कहा कि संसार के सभी धर्मग्रंथ एक समान है और सभी का मूल एक समान है। रास्ते अलग हो सकते है, लेकिन मंजिल एक है। मंच पर पहुंचे सभी संतों ने कुमार स्वामी को भारत साधु समाज का उपाध्यक्ष बनने पर बधाई दी। इस मौके पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि, महामंडलेश्वर डा. श्यामसुंदर दास, हरिचेतानंद, रामानंद पुरी, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत भगतराम, महामंडलेश्वर कैलाशानंद ब्रहमचारी, महंत मोहनदास, लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ के उपकुलपति प्रो. रमेश पांडे, पंडित राजकुमार शास्त्री आदि शामिल हुए।