शहर की तीनों सरकारी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही बृहस्पतिवार को मरीजों पर भारी पड़ी। कई महीने का बिजली का भुगतान नहीं करने पर ऊर्जा निगम ने अस्पतालों की बिजली काट दी। बिजली कटते ही व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई। मेला अस्पताल की ओपीडी में डाक्टरों को कैंडल जलाकर मरीजों की जांच करनी पड़ी। जिला और महिला अस्पताल में पैथोलॉजी लैब, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की मशीनें ठप पड़ी रही। दिनभर में एक भी जांच नहीं हो सकी। अस्पताल प्रशासन के अनुरोध पर शाम को तीन बजे जिला और महिला अस्पताल का कनेक्शन तो जोड़ दिया गया, लेकिन मेला अस्पताल में अंधेरा पसरा था।
जानकारी के अनुसार तीनों अस्पतालों पर ऊर्जा निगम का बिजली का बिल करीब पांच-पांच लाख रुपये बकाया चल रहा है। बृहस्पतिवार को ऊर्जा निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने 10.30 बजे कनेक्शन काट दिए। कुछ देर तक तो अस्पताल प्रबंधन यह सोचता रहा कि बिजली रुटीन की तरह गुल हुई है, लेकिन जब पता चला कि आसपास में बिजली तो कनेक्शन कटने का पता चला। बिजली कटते ही सभी व्यवस्थाएं ठप हो गई। ओपीडी में मरीजों को देखना मुश्किल हो गया। पैथोलॉजी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड आदि बंद हो गए। जिला और महिला अस्पताल में तो जेनरेटर चलाकर ओपीडी चली लेकिन मेला अस्पताल में चिकित्सकों को मोमबत्ति का सहारा लेना पड़ा। महिला अस्पताल में सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ी। महिलाओं के अल्ट्रासाउंड नहीं हुए और उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। ब्लड व अन्य जांच के लिए केवल सैंपल लिए गए। अस्पताल प्रशासन ने इस बाबत ऊर्जा निगम के अधिकारियों से वार्ता की। बिल शीघ्र जमा करने का आश्वासन मिलने पर ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने शाम को तीन कनेक्शन जोड़े। तीन बजे तक ओपीडी का समय खत्म हो चुका था।
मेला अस्पताल का आज जुड़ेगा कनेक्शन
मेला अस्पताल के अधीक्षक डा. एचके सिंह ने बताया कि अस्पताल पर केवल 5 लाख रुपये का बकाया है, जो कि रनिंग में है। बजट न मिलने से बिजली का बिल जमा नहीं हो सका है। उन्होंने बताया जिलाधिकारी हरबंस सिंह चुघ को अवगत करा दिया गया है। उन्होंने शीघ्र ही बजट जारी होने का आश्वासन दिया है। ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने शुक्रवार को कनेक्शन जोड़ने को आश्वस्त किया है।
किसी तरह से चलाई चाइल्ट केयर यूनिट
महिला अस्पताल में जेनरेटर चलाकर उजाला तो कर दिया, लेकिन अन्य व्यवस्था ठप रही। अस्पताल में चाइल्ड केयर यूनिट को जैसे तैसे चलाया। अस्पताल की सीएमओ डा. भवानी पाल ने बताया कि अस्पताल पर केवल 7 या 8 महीने का ऊर्जा निगम के बिल का बकाया है, जोकि रनिंग में है। ऊर्जा निगम के अधिकारियों से वार्ता की और उन्हें लिखित में बिल देने का आश्वासन दिया गया है।
बिना नोटिस की काटी बिजली
सीएमएस डा. आरती ढौंडियाल ने बताया कि ऊर्जा निगम की ओर से बकाया बिल जमा करने के कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। उन्होंने बताया नोटिस मिलता तो बिल जमा करने की प्रक्रिया शुरू करते, लेकिन बिना सूचना दिए कनेक्शन काटने की शिकायत ऊर्जा निगम के अधिकारियों की।
सरकारी अस्पतालों पर 20 लाख रुपये से अधिक का बकाया है। पिछले डेढ़ महीने पहले नोटिस दिया था, तो बिल जमा करने के बजाय बिल अधिक भेजना बताते हुए संशोधन करने को जवाब दिया गया। अब कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर तीनों अस्पतालों के कनेक्शन काट दिए। बाद में लिखित आश्वासन देने पर कनेक्शन जोड़े गए।
- वीएस पंवार, अधिशासी अभियंता, नगरीय क्षेत्र हरिद्वार।