हरिद्वार। मध्यप्रदेश के मजदूर परिवार की तीन साल की मासूम बेटी नाटकीय ढंग से 13 घंटे बाद मोतीचूर रेलवे स्टेशन पर रोती हुई मिली। मासूम सोमवार की रात को अपने माता-पिता के साथ घर पर सो रही थी। मंगलवार सुबह वह बिस्तर पर नहीं मिली थी। आशंका जताई जा रही थी मासूम का अपहरण हुआ है।
मध्यप्रदेश के हटा जिला दमोह का रहने वाला राजबीर अपने परिवार साथ करीब डेढ़ माह पूर्व आया था। वो भूपतवाला के इंद्रएनक्लेव फेज टू में पत्नी रजनी की बुआ गौरा देवी के यहां ही रहने लगा। पेशे से दिहाडी मजदूर राजू की जब आंख मंगलवार सुबह करीब पांच बजे खुली तो वो दंग रह गया। उसकी तीन साल की बेटी अंजलि गायब थी। घर से लेकर आसपास के क्षेत्र में उसे तलाशा लेकिन पता नहीं चल सका। करीब एक घंटे बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गई। सूचना पर पुलिस घर पहुंची। घर के पिछले हिस्से पर बनी चाहरदीवारी में एक लकड़ी की सीढ़ी अंदर की ओर लगी थी। पुलिस ने रेलवे लाइन से सटे जंगल को दूर तक खंगाला लेकिन कोई सफलता नहीं मिल पाई।
इधर, पुलिस अभी जंगल ही खंगाल रही थी कि शाम करीब छह बजे एक वनकर्मी ने एक मासूम के मोतीचूर रेलवे स्टेशन पर रोते बिलखते हुए मिलने की सूचना दी। सूचना पर पुलिस पहुंची तो वहां मासूम अंजलि मिली। परिजनों को चौकी पर बुलाया गया। रोती बिलखती अंजलि मां को देखते ही लिपट गई। कोतवाली प्रभारी योगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि मासूम लावारिस मिली है, आरोपी का पकड़ा जाना जरूरी है। हर पहलू पर जांच कर रहे हैं।