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कोल्हुओं में गुड़ बनाने का काम ठप, संचालक परेशान

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धनौरी में बारिश होने से बंद हुआ कोल्हू । - फोटो : HARIDWAR
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मौसम की मार से गन्ना कोल्हू भी नहीं बच पाए। पिछले सप्ताह लगातार कई दिन की बारिश से कोल्हुओं की भट्ठियों में भारी भर गया और ईंधन के प्रयोग की जाने वाली गन्ने की खोई भीग गई थी। अब कोहरा छाने से न भट्ठियां सूख पाई और न ही खाई। ऐसे में सैकड़ों कोल्हुओं में गुड़ बनाने का ठप पड़ा है। कोल्हू मालिकों को हर रोज नुकसान उठाना पड़ रहा।
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हरिद्वार जिले में करीब 350 कोल्हू हैं। जाड़ों में गुड़ की काफी अधिक मांग रहती है। देहात क्षेत्र में बनने वाले गुड़ की डिमांड हरिद्वार के अलावा उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक होती है। कोल्हू मालिक एडवांस ले लेते हैं, लेकिन पिछले सप्ताह चार दिन की मूसलाधार बारिश से कई जगह कोल्हू की भट्ठियों में भी पानी भर गया था। ईंधन के रूप में प्रयोग होने वाली गन्ने की खोई भी भीग गई थी। बारिश रुकी तो अब देहात क्षेत्र में सुबह से ही घना कोहरा छा रहा है। कोहरे के चलते सूरज के दर्शन नहीं हो रहे। धूप नहीं निकलने से खोई सूख नहीं पा रही है और कोल्हुओं भट्ठियां ठंडी पड़ी हैं। कोल्हू संचालकों का कहना है कि चटख धूप निकले तो खोई की नमी दूर कर गुड़ बनाने की भट्टियों को सुलगा सकें। संवाद
हरिद्वार जिले में करीब 350 कोल्हू हैं। प्रत्येक कोल्हू को हर दिन औसतन 70 हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। सभी कोल्हुओं संचालकों को हर दिन करीब ढाई करोड़ रुपये की चपत लग रही है।
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- अंकित कुमार, अध्यक्ष भारतीय उत्थान परिषद ट्रस्ट
सर्दियों में गुड़ की मांग अधिक है। पिछले एक सप्ताह से कोल्हू चल ही नहीं पा रहे हैं। गन्ने की खोई भीग गई थी। अब कोहरा आने से खोई सूख नहीं पा रही है। कोल्हू कैसे चलाएं समझ नहीं आ रहा है।
- राशिद, कोल्हू स्वामी
पाला और कोहरे से फसलों को नुकसान
पथरी। कोहरा के साथ पाला गिरने से फसलों को नुकसान होने लगा है। शुक्रवार रात काफी घना कोहरा रहा और शनिवार पूरे दिन कोहरा छाया रहा। शनिवार को सूरज के दर्शन नहीं हुए। इससे कड़ाके की ठंड ने लोगों की दिनचर्या बदल दी। अधिकांश लोग घरों में रहे। जरूरी काम से ही लोग घरों से बाहर निकले। सर्दी से बचने के लिए लोगों ने अलाव और गरम कपड़ोंक ा सहारा लिया। रविन्द्र, राजपाल, कंवरपाल, नूतन कुमार आदि किसानों का कहना है कि पाले से चना, मसूर, पालक, गोभी आदि फसल को नुकसान पहुंचेगा। संवाद
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