प्रदेशभर में शिक्षकों के अटैचमेंट पर शिक्षा मंत्री की सख्ती से जिले के शिक्षकों में भी हड़कंप मचा है। हालांकि अमर उजाला के खुलासे के बाद शासन ने एक पखवाड़ा पूर्व ही ही ऐसे शिक्षकों को स्कूल लौटने के लिए एक हफ्ते का अल्टीमेटम दिया था। जिसके बाद कुछ शिक्षकों ने बाबूगिरी छोड़ स्कूलों में आमद भी कराई, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अभी भी काफी संख्या में शिक्षक अटैचमेंट पर चल रहे हैं।
अटैचमेंट का खेल खेलने वाले शिक्षकों की हरिद्वार जनपद में कमी नहीं है। बहादराबाद, रुड़की, लक्सर, खानपुर, भगवानपुर व नारसन ब्लॉक के दूरस्थ इलाकों में तैनात शिक्षकों ने मनमाफिक ड्यूटी करने के लिए बाबूगिरी करने से भी गुरेज नहीं किया। इतना नहीं कोई शिक्षक मिड-डे-मिल के चावल बांट रहा तो कोई डिप्टी बीईओ दफ्तरों से स्कूलों में चिट्ठी पहुंचाने का काम भी खुश रहा। आश्चर्य की बात यह है कि ये खेल शासन स्तर से अटैचमेंट रद्द होने के बाद खेला जाता रहा। अमर उजाला ने बीते तीन मार्च के अंक में इस खेल का खुलासा करते हुए शासन का ध्यान इस ओर दिलाया था। जिस पर अपर शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट ने विभाग से रिपोर्ट मांगी थी और रिपोर्ट मिलने के बाद ऐसे शिक्षकों को स्कूल लौटने के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया था। कुछ शिक्षक दफ्तरों से स्कूल वापस भी पहुंचे, लेकिन जिले के अधिकारियों ने इस पर दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय की सख्ती के बाद शासन ने सभी जिलों से ऐसे शिक्षकों का ब्यौरा मांगा है। जिससे नियमों को ठेंगे पर रखने वाले शिक्षकों और उन्हें संरक्षण देने वाले निचले अधिकारियों में हड़कंप मचा है।
ब्लॉक दफ्तरों से खेला जाता रहा खेल
शिक्षकों के अटैचमेंट का पूरा खेल ब्लॉक और डिप्टी बीईओ दफ्तरों से खेला गया। निचले अधिकारियों ने ऐसे शिक्षकों को पूरा संरक्षण दिया और खुद ही नियमों की धज्जियां उड़वाई। चौंकाने वाली बात यह है कि अमर उजाला के खुलासे के समय भी जिले के अफसरों को ये नहीं मालूम था कि जनपद में कितने शिक्षक अटैचमेंट पर चल रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति आज भी है। अब शासन ने ब्यौरा मांगा है तो ब्लॉक दफ्तरों से इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
शिक्षक राजनीति से मिलता रहा खाद पानी
नियमों को ताक पर रखकर अटैचमेंट का खेल खेलने वाले शिक्षकों के लिए संगठनों की राजनीति ने खाद और पानी का काम किया। कई शिक्षक संगठन के पदाधिकारियों के करीबी रहे। यही वजह है कि अधिकारियों ने कभी इस विषय में दिलचस्पी नहीं ली।
शासन ने अटैचमेंट पर चल रहे शिक्षकों का ब्यौरा मांगा है। जिले स्तर से कोई भी अटैचमेंट नहीं है। ब्लॉक दफ्तरों से इसकी जानकारी मांगी जा रही है। ब्यौरा मिलने के बाद शासन को भेज दिया जाएगा।
- जगमोहन सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक हरिद्वार