धर्मनगरी में वसंत पंचमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। समूची पंचपुरी वसंत के रंग के वासंती हो उठी। आकाश पर दिनभर पतंगों की छटा छाई रही। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं ने यज्ञोपवीत और मुंडन संस्कार संपन्न कराए। घरों और मंदिरों में मां सरस्वती की पूजा अर्चना की गई।
वसंत पर्व का आरंभ बड़े सबेरे तक हुआ जब आकाश पर दूर-दूर तक कोहरा छाया हुआ था। इसके बावजूद अंधेरे से ही पंतगें उड़नी प्रारंभ हो गई थी। पतंगबाजी का गढ़ कहे जाने वाले ज्वालापुर और कनखल में सड़कों एवं छतों पर बच्चे पहले ही पहुंच गए थे। अनेक पतंग बाजों ने रातभर पंतग उड़ाई। दिन निकलने के बाद गंगा से सटे मैदानों में भी पंतग बाज पहुंच गए। रंग-बिरंगी पंतगें देर शाम तक उड़ाई जाती रही। वसंत का उल्लास घरों में भी दिखायी पड़ा। दोपहर के समय मां सरस्वती की पूजा की गई। घरों में श्रीखंड आदि पीले भोजन तैयार कर भगवान को भोग लगाया गया। इसी प्रकार जिन मंदिरों में सरस्वती विराजमान है, उनमें भक्त पहुंचे। देवी मंदिरों में भी श्रद्घालुओं ने मां शारदा की अर्चना की।
हजारों यात्रियों ने हरकी पैड़ी और कुशावर्त घाट पर जाकर मुंडन, कर्णछेदन और यज्ञोपवीत संस्कार कराए। विशेष रूप से कुमाऊं मंडल से आए यात्रियों की भीड़ देर शाम तक गंगा घाटों पर लगी रही। परंपरागत पर्वतीय वेशभूषा धारण किए हुए यात्रियों के संस्कार देखने के लिए अनेक लोग घाटों पर पहुंचे। हजारों श्रद्घालुओं ने गंगा मैया में डूबकी भी लगाई।