हरिद्वार। खरना पर्व पंचपुरी, भेल और सिडकुल में श्रद्घा पूर्वक मनाया गया। व्रती महिलाओं ने निर्जल व्रत रखकर छठ मैया की पूजा अर्चना की। सायंकाल खीर और पूरी बनाकर परंपराओं का निर्वहन किया गया। कुंवारी कन्याओं का भोग लगाने के बाद व्रती स्त्रियों ने सात्विक भोजन ग्रहण किया। भोजन के बाद 36 घंटे लंबा व्रत प्रारंभ हो गया है। डाला छठ महोत्सव आज मनाया जाएगा।
खरना वास्तव में शुद्धि का पर्व है। इस दिन मुख में तिनका भी न जाए, इस भावना से पर्व को खरना नाम दिया गया है। सवेरे से महिलाओं ने अनेक स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया। मुख्य आयोजन कनखल में कुसुम त्रिपाठी, ललिता मिश्रा, कमलेश्वर मिश्रा आदि के संयोजन में हुआ। मांगलिक वस्त्र पहनकर महिलाओं ने छठी मैया के गीत गाये। पारंपरिक लोकगीत गाते हुए शाम के लिए भोजन तैयार किया गया। सबसे पहले गऊ माता तथा बाद में कुंवारी कन्याओं को भोजन कराकर व्रती महिलाओं ने भोजन ग्रहण किया।
पूर्वांचल जन जागृति संस्था के संयोजन में ऐसे ही कार्यक्रम पंचपुरी, सुभाष नगर, शिवालिक नगर, भेल और सिडकुल में भी आयोजित किए गए। सभी जगह अध्यक्ष ब्रह्माशंकर चौबे, मार्कण्डेय सिंह, रामयश सिंह, ललिता मिश्रा, सुनील पाण्डेय,विकास सिंह, बीजी शुक्ला, जेएस श्रीवास्तव, रामप्रवेश साह, राजेन्द्र यादव, सुगंधी रानी, कौशल्या देवी, पूजा रानी, विरेन्द्र मौर्य, जेसी सिंह आदि उपस्थित थे।
छठ महोत्सव का मुख्य दिन मंगलवार को है। दिनभर की तैयारियों के बाद छोटे-छोटे जुलूस गंगा तट पर पहुंचेगे। सोमवार की शाम तक भी जल न छोड़े जाने से पूर्वांचल वासी खासे हताश है। यद्यपि सिंचाई विभाग ने हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड पर जल लाने की तैयारियां शुरू कर दी है। पत्थरों और रेत को नियोजित कर गंगा जल लाने का मार्ग तैयार किया जा रहा है। इसके बावजूद पूर्वोंत्तर समाज नीलधार पर भी महोत्सव की तैयारियां कर रहा है। सायंकाल हजारों महिलाएं दक्षिण दिशा की ओर मुख कर अस्तांचल सूर्य को अर्ध्य प्रदान करेंगी।