कांगड़ा मंदिर पर बैठक करते शहर व्यापार मंडल के पदाधिकारी ।
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हरकी पैड़ी विस्तारीकरण को लेकर मेला प्रशासन ने व्यापारियों व स्थानीय निवासियों को कोई स्पष्ट निर्देश दिए बिना लाल निशान लगाए जाने से व्यापारियों में भय व्याप्त है। इसको लेकर शहर व्यापार मंडल ने एक बैठक आयोजित की।
बृहस्पतिवार को कांगड़ा मंदिर पर शहर व्यापार मंडल की बैठक में व्यापारियों ने मेला प्रशासन की कार्रवाई के प्रति नाराजगी जाहिर की है। इस संबंध में निर्णय लिया गया कि जल्द ही व्यापार मंडल का एक प्रतिनिधिमंडल मेला अधिकारी से मुलाकात भी करेगा। जिला व्यापार मंडल के महामंत्री संजीव नैयर ने कहा कि मेला विभाग ने व्यापारियों को विश्वास में नहीं लिया है। जबकि किसी भी मेले से पूर्व व्यापारियों के साथ बैठकर एक आपसी सामंजस्य बनाया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि हरकी पैड़ी के विस्तारीकरण का मामला उच्च न्यायालय नैनीताल में विचाराधीन है। बावजूद इसके मेला विभाग ने कांगड़ा मंदिर क्षेत्र में लाल निशान लगा दिए हैं। शहर व्यापार मंडल के अध्यक्ष कमल बृजवासी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के अनुरूप ही मेला प्रशासन को कोई निर्णय लेना चाहिए। उच्च न्यायालय ने 2014 में शासन की अधिसूचना को निरस्त करते हुए 2013 के अधिग्रहण संबंधी प्रावधानों के तहत दोबारा अधिसूचना जारी करने के आदेश दिए थे। कांगड़ा मंदिर व्यापार मंडल के अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि मेलाधिकारी ने हाल में ही इस क्षेत्र का निरीक्षण किया था। इसके बाद मेला प्रशासन की टीम ने लाल निशान लगा दिए हैं। जबकि इस संबंध में कई बार प्रशासन से पूछे जाने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है। स्पष्ट जानकारी न मिलने से व्यापारियों में भय बना हुआ है। कांगड़ा मंदिर के प्रबंधक जगराम सिंह ने कहा कि बिना किसी सूचना, जानकारी के लाल निशान लगाने से लोग डरे हुए हैं। बैठक में निर्णय लिया गया कि व्यापार मंडल का एक प्रतिनिधिमंडल मेलाधिकारी से मुलाकात कर पूरे मामले में व्यापारियों व स्थानीय लोगों का पक्ष रखेगा। बैठक का संचालन शहर महामंत्री राजीव पाराशर ने किया। इस अवसर पर व्यापारी नेता विनोद मिश्रा, संगीत मदान, अमित बंसल, वीरेंद्र सिंह, हरि प्रसाद, योगेश कुमार, नरेंद्र कुमार, राहुल रोहेला, राकेश कुमार, राहुल गुप्ता, गणेश शर्मा, हितेश शर्मा, सोनू, कल्लू, सागर, सुबोध, संजीत, रोहित, अनिता देवी, मोहित कुमार, सुरेलता देवी, मनजीत आदि मुख्य थे।