खनन की सूचना पर मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने बुधवार तड़के जल का त्याग कर दिया था। प्रशासन को खबर करने पर जब पोकलैंड और जेसीबी गंगा से बाहर आने पर आश्वस्त हुए तो उन्होंने पानी पिया। उन्होंने प्रशासन पर खनन की मंशा रखने का आरोप लगाया।
मातृसदन में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान स्वामी शिवानंद ने बताया कि सुबह साढ़े तीन बजे के करीब उन्हें गंगा में भोगपुर बिशनपुर के बीच दो दर्जन से अधिक पोकलैंड और जेसीबी घुसने की खबर मिली थी। उन्होंने जिलाधिकारी को इस बाबत मैसेज किया लेकिन जवाब नहीं मिला। जिसके चलते उन्होंने पानी पीना बंद कर दिया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद शासन स्तर से खनन को बंद कराया गया। जब वह पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि वास्तव में खनन बंद हो गया है तो उन्होंने पानी पिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की मंशा अवैध खनन कराने की है। उन्होंने यदि फिर इसे शुरू किया तो वह जल लेना बंद कर देंगे।
बताया कि जब उन्होंने जल का त्याग किया था तो 24 मई की देर रात प्रशासन ने बातचीत का माहौल बनाने के लिए दो दिन बाद गंगा से जेसीबी और पोकलैंड निकलवाने की बात कही थी। जिसके चलते उन्होंने जल त्याग बंद करके इलेक्ट्राल लेना शुरू किया था। लेेकिन अगले दिन तक वार्ता का सिलसिला शुरू नहीं किया।
उन्होंने बताया कि प्रशासन का यह कहना कि कई सालों से खनन बंद होने के कारण नदी के बीच का तल ऊपर उठ गया और पानी का बहाव किनारे पर होने लगा, बिलकुल गलत और निराधार है। उन्होंने कहा कि गूगल से लिए गए वर्ष 2013 के फोटो से साफ जाहिर है कि गंगा का बहाव इतने सालों में नहीं बदला।
बल्कि गंगा में खुदाई करने से बीच का तल ऊपर दिखाई देता है। उन्होंने चेेतावनी दी यदि फिर गंगा में खनन किया गया तो वह जल का त्याग कर देंगे।