हरिद्वार। 14 जून को फैक्ट्रीकर्मी विशाल वत्स की पत्नी वैष्णवी ने ही अपने घर हुई फर्जी लूट की योजना गढ़ी थी। आर्थिक तंगी के चलते ही महिला ने ताना बाना बुनने की बात कबूली है। घर से ही ज्वालापुर पुलिस ने सोने चांदी के जेवरात एवं 98 हजार की नगदी बरामद कर ली है। महिला के परिजन भी एक बारगी खुलासे से सन्न रह गए।
ज्वालापुर क्षेत्र के मोहल्ला चौहनान में किराये पर रहने वाले फैक्ट्रीकर्मी विशाल वत्स की पत्नी वैष्णवी को ब्लेड से घायल और गर्म वस्तु से झुलसाकर सोने चांदी के जेवरात एवं करीब एक लाख की नगदी लूट लेने का मामला सामने आया था। पीड़िता ने बताया था कि किराये का मकान लेने की बात कहकर लुटेरे अंदर दाखिल हुए थे। दिनदहाडे भीड़भाड़ वाले इलाके में घर में घुसकर लूट की कहानी पुलिस को हजम नहीं हो रही थी। बृहस्पतिवार को मोहल्ला चौहनान में फैक्ट्रीकर्मी के घर पहुंची पुलिस टीम ने जब महिला को कुरेदा तब कुछ ही देर में महिला ने पूरी कहानी उगल दी। कबूला कि, उसने ही फर्जी लूट की योजना का ताना बाना बुना था और खुद ही कटर से हाथ काटे थे और लस्सी बनाने में इस्तेमाल होने वाली मथनी को गर्म कर अपने हाथ पर निशान बनाए थे। वो बदहवास अवस्था में कमरे के अंदर दाखिल हुई थी और अंदर से कुंडा बंद कर लिया था। फिर अपनी बेटी को बाहर बदमाश होने की बात कही थी ताकि किसी को संदेह न हो। फिर देवर को फोन कर यह सूचना दी थी। उसे यह मालूम नहीं था कि मामला पुलिस तक पहुंच जाएगा। कबूला कि उसने पांच हजार रुपये में गिरवी रखे अपने मंगलसूत्र को छुड़ाने एवं नए जेवरात लेने के लालच में उसने ये पूरी घटना की योजना बनाई। पुलिस ने महिला की निशानदेही पर घर में स्टोर में छिपाकर रखे गए सोने चांदी के जेवरात एवं 98 हजार की नगदी बरामद कर ली। कोतवाली प्रभारी धीरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि अग्रिम कार्रवाई उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद की जाएगी।
अपने रोल को सही से निभा नहीं पाई वैष्णवी
हरिद्वार। कहा जाता है कि नकल के लिए भी अक्ल की जरूरत होती है। यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ। वैष्णवी ने लूट की फर्जी योजना का आइडिया भले ही कही से भी लिया हो लेकिन वो उसकी पटकथा ठीक से नहीं गढ़ पाई थी। इसलिए, उसकी कमजोर पटकथा कुछ ही समय में तार तार हो गई। दरअसल, घटना के अंदाज को लेकर पुलिस हैरान तो थी। उसकी बड़ी वजह महिला के हाथ पर धारदार हथियार से कट मारने एवं उसे झुलसा देने वाली थी। भला जब महिला ने सब जेवर उतारकर दे दिए तब अपराधी हिंसक क्यों हुए। ये बात ही गले से नीचे नहीं उतर रही थी। फिर उससे भी बड़ा क्लू महिला ने खुद ही दे दिया था। घटना के बाद महिला ने कबूला था कि लुटेरों ने अलमारी में रखी नगदी खुद निकाली थी लेकिन तब उसकी छह साल की बेटी ने पुलिस को बताया था कि अंदर वाले कमरे में कोई आया ही नहीं था। क्योंकि, उनकी मां ने ही कमरा बंद कर बदमाश घुस आने की बात कही थी। यही से ही पुलिस का माथा ठनका था लेकिन ताजी ताजी घटना पर पुलिस खामोश रही। बस पुलिस फिर ने अपनी चाल चल दी। बकौल कोतवाल कि, महिला के देवर निशांत ने जमीन खरीदने के लिए अपने दोस्त से पैसे उधार लिए थे। बात न बनने पर सौदा तय नहीं हो सका था और वो अपने दोस्त को पैसे लौटाने वाला था। इसलिए, महिला ने पूरा प्लॉन बनाया था ताकि वो जेवर खरीद पाए।
भावुकता में उगला सच
हरिद्वार। भले ही वैष्णवी ने खतरनाक योजना बनाई हो लेकिन वो उस रोल को पूरी तरह से निभा नहीं पाई। दरअसल, घटना के बाद से ही पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ था और हर कोई परेशान था। पुलिस भी रेाज रोज घर आ रही थी। सास, ससुर, पति और देवर पक चुके थे। इसलिए ही महिला भावुक हो गई और सब कुछ सच उगल दिया।