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हरिद्वार को रेड जोन में रखे जाने से हर कोई अचंभित

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शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से जारी देशभर के जिलों की कैटगिरी में हरिद्वार को रेड और देहरादून को ओरेंज जोन में शामिल किया गया है। हरिद्वार जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की कुल संख्या को देखें तो वह देहरादून के मुकाबले बहुत कम है। इतना ही नहीं हरिद्वार में सात में से पांच मरीज ठीक हो चुके हैं। इसके बाद भी रेड जोन में रखना किसी के गले नहीं उतर रहा। शहर का आम से खास यही सवाल कर रहा है कि आखिर मानक क्या है। प्रशासन के अधिकारी भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं। अधिकारियों का मानना है कि अब जब भी समीक्षा होगी तो हरिद्वार रेड से ओरेंज जोन में शामिल हो जाएगा।
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केंद्र सरकार ने शुक्रवार को नई गाइडलाइन जारी करते हुए 17 मई तक के लिए लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी है। हरिद्वार जनपद में कोरोना के पॉजीटिव मरीजों की कुल संख्या सात थी जिनमें से पांच ठीक होकर अपने घर चले गए हैं और केवल दो ही मरीज उपचाराधीन हैं। चिकित्सकों का कहना है कि वह भी ठीक हो रहे हैं। पिछले 15 दिनों से एक भी कोई नया मामला हरिद्वार में नहीं आया है।
व्यापार मंडल के जिला महामंत्री संजीव नैयर का कहना है हरिद्वार जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता से हरिद्वार में स्थिति लगभग नियंत्रण वाली है। ऐसे में हरिद्वार में थोड़ी ढील दी जानी चाहिए थी। ढील देने की बजाय हरिद्वार को रेड जोन में रख दिया। उन्होंने आग्रह किया कि अस्थि विसर्जन जैसी अति आवश्यक कार्यों के लिए छूट मिलनी चाहिए।
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श्री गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा और महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने भी हरिद्वार को रेड जोन में ही रखे जाने पर आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि सरकार की बाध्यता अपनी जगह है, लेकिन जब विभिन्न क्षेत्रों में छूट दी जा रही है तो हरकी पैड़ी क्षेत्र में अस्थि विसर्जन जैसे कार्यों के लिए आने वाले लोगों को भी सशर्त अनुमति दी जानी चाहिए।
ज्वालापुर के व्यापारी नेता रवि धींगड़ा और प्रवीण कुमार ने भी हरिद्वार के बारे में नए सिरे से समीक्षा करने और बाजारों को खोलने के लिए ढील देने की मांग सरकार से उठाई।
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18 अप्रैल के बाद से नहीं आया कोई मरीज
हरिद्वार। हरिद्वार जनपद में पहला मामला चार अप्रैल को और अंतिम मरीज 18 अप्रैल को आया। इसके बाद कोई मरीज सामने नहीं आया। पहला मरीज चार अप्रैल को पनियाला गांव, दूसरा सात अप्रैल को ज्वालापुर के पांवधाई से, तीसरा मरीज आठ अप्रैल को पांवधोई से ही, चौथा 14 अप्रैल को भगवानपुर के मानकपुर माजरा, पांचवा 14 अप्रैल को लक्सर के बहादरपुर खादर, छठां 18 अप्रैल को हाथरस के मजदूर और सातवां 18 अप्रैल को मानकपुर माजरा से आया था।
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हरिद्वार में जो भी कोराना पाजिटिव मरीज मिले थे उनकी स्थिति सुधरी है और हालात में भी सुधार हुआ है। संभवतया केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए मानकों के कारण हरिद्वार रेड जोन में रह गया होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले सोमवार को केंद्र सरकार के स्तर पर होने वाली पुनर्समीक्षा में हरिद्वार रेड जोन से बाहर निकल सकता है। इस बारे में स्थानीय स्तर पर कुछ भी कहना उचित नहीं है।
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- सी रविशंकर, जिलाधिकारी हरिद्वार
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