गायत्री परिवार के प्रमुख डा. प्रणव पंड्या दस दिवसीय अमेरिका-कनाड़ा प्रवास से हरिद्वार लौटे। उन्होंने गायत्री परिवार के सबसे बड़े गायत्री चेतना केंद्र न्यूजर्सी में ऋषिसत्ता की प्रतीक ‘प्रखर प्रज्ञा-सजल श्रद्धा’ की स्थापना भव्य आयोजन के साथ संपन्न की।
शांतिकुंज में आयोजित कार्यक्रम में डा. पंड्या ने बताया कि युगऋषि पं श्रीराम शर्मा आचार्य की पुस्तक ‘मैं क्या हूँ’ पर आधारित ‘टू आस्क इज द की-आलवेज सीक नालेज बिकाज नोइंग एमपॉवर यू’ पर आधारित नेशनल यूथ कैंप में अमेरिका कनाडा के सैकड़ों युवाओं ने जाना कि ज्ञान प्राप्त करने की जिज्ञासा से ही व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है।
अमेरिका के ह्यूस्टन, अटलांटा, लॉस ऐंजल्स, सेन फ्रांसिस्को, शिकागो, पेन्सिलवेनिया, वाशिंगटन, नार्थ केरोलिना, न्यूयार्क-न्यूजर्सी एवं विभिन्न स्टेट एवं कनाडा के टोरंटो, मांट्रियल, विनिपेग, वेनकूवर से आये हुए लोगों की उपस्थिति में प्रखर प्रज्ञा-सलज श्रद्धा की स्थापना वैदिक रीति के साथ सम्पन्न हुई।
इस अवसर पर आयोजित दीप महायज्ञ में बाल संस्कारशाला के बच्चों ने युग साहित्य विस्तार वर्ष में पूज्य गुरुदेव का मूलभूत चिंतन ‘मैं व्यक्ति नहीं विचार हूँ’ विषय पर सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न किया। वहीं डा. पण्ड्या के सहयोगी योगाचार्यों ने उपस्थित जनसमुदाय को योग के व्यावहारिक सूत्रों के साथ योगाभ्यास भी कराया।
शांतिकुंज व्यवस्थापक गौरीशकर शर्मा ने बताया कि दल में देव संस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय, डा. ओमप्रकाश शर्मा, प्रो. विश्वप्रकाश त्रिपाठी, राजकुमार वैष्णव, शांतिभाई पटेल, रमेश तिवारी, पुष्कर राज सहित सात सदस्यीय सदस्य थे।