शहर से लेकर देहात तक एक बार फिर से सभी एटीएम ने धोखा दे दिया। एटीएम में कैश नहीं होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोग दिनभर एक एटीएम से दूसरे एटीएम चक्कर काटते रहे। सबसे ज्यादा परेशानी बाहर से आए लोगों को उठानी पड़ी। एटीएम से कैश नहीं मिलने पर लोगों को छोटी-छोटी रकम के लिए भी बैंकों में लाइन लगानी पड़ी।
बैंक अधिकारी नगदी की किल्लत होने की बात कह रहे हैं, लेकिन बैंकों में लेनदेन में नगदी की कोई कमी नहीं है। पिछले साल आठ नवंबर की रात को एक हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद करने के बाद लोगों को कैश के लिए लंबे समय तक एटीएम और बैंकों में घंटों लाइन लगानी पड़ी थी। हरिद्वार और रुड़की में तो यह समस्या करीब दो महीने तक बनी रही थी, लेकिन फरवरी के अंतिम सप्ताह के बाद स्थिति सामान्य होने लगी थी। मार्च के महीने लोगों को एटीएम से पैसे निकालने में कोई दिक्कत नहीं हुई। अब फिर से पुरानी समस्या खड़ी हो गई है। पिछले कई दिनों से शहर और आसपास के एटीएम खाली पड़े हैं।
शनिवार और रविवार को एटीएम में पैसा नहीं होने पर उम्मीद जताई जा रही थी कि सोमवार को स्थिति सामान्य हो जाएगी। सोमवार और मंगलवार को भी अधिकांश एटीएम में नो कैश के नोटिस लटके रहे।बाहरी बैंकों के खाताधारकों के साथ फैक्ट्रियों के श्रमिक एटीएम में नगदी न होने से परेशान हैं। जनपद के 337 एटीएम में से एक में भी रुपया नहीं डाला जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले देश विदेश के यात्रियों को निराश होना पड़ रहा है। बड़े स्टोरों और शॉपिंग कांपलेक्स में एटीएम से भुगतान कर दिया जाता है, लेकिन छोटे दुकानदार, ठेले आदि पर भुगतान करने में समस्या उठानी पड़ रही है। वहीं दूसरी और बैंकों में पर्याप्त धन का लेनदेन हो रहा है। निकासी की सीमा समाप्त होने पर खाताधारकों को पूरी नगदी दी जा रही है। लेकिन एटीएम खाली होने से व्यवस्था पर सवाल उठाया जा रहा है।
शादी के सीजन में लोग परेशान
इस समय शादी का सीजन चल रहा है। एटीएम में नगदी न होने से लोग परेशान है। शादी के परिवारों के साथ अन्य लोग भी एटीएम के भरोसे बाजार में पहुंचते हैं, लेकिन नगदी न मिलने से बिना खरीदारी के जाना पड़ा रहा है। ऐसे में लोगों को एक दूसरे से उधार में रुपये लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। भगत सिंह चौक निवासी बाबूराम के अनुसार उनके घर में मांगलिक कार्यक्रम था इसके लिए पैसा जुटाना बहुत परेशानी भरा रहा। एटीएम के दर्जनों चक्कर लगाए।
क्या ग्राहकों को डिजिटल लेनदेन को आकर्षित करना
फिलहाल वित्त मंत्रालय का प्रयास बिना नगदी के लेनदेन पर जोर है और इसके लिए पूरा प्रचार प्रसार किया जा रहा है। तो दूसरी ओर बैंकों के अधिकांश उपभोक्ता एटीएम के भरोसे नगदी का लेनदेन करते हैं। अब एटीएम में नगदी न होने से कयास लगाया जा रहा है कि लोगों को डिजिटल के प्रति मजबूर करने को एटीएम में नगदी नहीं डाली जा रही है।
बाजार में अभी भी इस समय 2000 का नोट चलाने में परेशानी आ रही है या फिर 2000 का नोट लोगों ने जमा कर लिया है। इससे बाजार में नगदी की कमी है। बैंकों के खाताधारकों के साथ ही लेनदेन करने का प्रयास जारी है। सरकार का प्रयास भी डिजिटल के प्रति बढ़ावा देना है। वित्त मंत्रालय के साथ उच्च अधिकारियों को एटीएम में नगदी पर्याप्त रखने को अवगत कराया है।
- केएस पॉल, लीड बैंक मैनेजर।