पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हरकी पैड़ी पर गंगा की धारा के संबंध में उनकी सरकार के समय शासनादेश हरिद्वार के लोगों के हित में ही जारी किया गया था। इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। यदि इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे मौजूदा सरकार के समक्ष पैरवी कर शासनादेश को खारिज करा सकते हैं।
पूर्व सीएम ने अमर उजाला से दूरभाष पर वार्ता करते हुए कहा कि मां गंगा के प्रति उनकी अगाध आस्था है। हरिद्वार में हरकी पैड़ी के आसपास भारी संख्या में लोगों के निजी और व्यवसायिक भवन हैं। गंगा की धारा के आसपास निर्धारित क्षेत्र तक कोई निर्माण नहीं किया जा सकता। इस पर रोक होने के चलते यह सभी भवन हमेशा कानूनी विवादों में उलझे रहते हैं। लोगों का नुकसान न हो, इसलिए उनकी सरकार के समय बचाव का रास्ता निकालते हुए इसे स्कैप चैनल का नाम दिया था, लेकिन यदि इससे गंगा सभा या अन्य लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं तो इस शासनादेश को खारिज करा सकते हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रदेश की नई सरकार ने अपनी जो भी प्राथमिकताएं बताई हैं, उससे यह स्पष्ट है कि सरकार सही दशा और दिशा में जा रही है। पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस और विकास को लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जो भी वादे और दावे किए हैं, वे राज्य के हित में सही दिशा में जाते दिखाई दे रहे हैं।