क्षेत्र के गांव कांगड़ी में एक ग्रामीण की ईंट से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी गई। हत्याकांड की सुई मृतक की सौतेली मां के इर्दगिर्द ही घूम रही है। दिन भर सौतेली मां को हिरासत में लेकर पूछताछ का सिलसिला चलता रहा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
देर रात ढाई बजे गांव कांगड़ी में एक ग्रामीण की हत्या होने की सूचना श्यामपुर पुलिस को मिली। थानाध्यक्ष अनुज सिंह, एसआई महावीर सिंह रावत घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां घर के आंगन में विक्रम (46) पुत्र स्व.रमेश का खून से लथपथ शव पड़ा था । उसके सिर के पिछले हिस्से में गहरे घाव थे। घटनास्थल पर ही खून से सनी एक ईंट भी मिली।
पुलिस पूछताछ में सौतेली मां ने जानकारी दी कि देर रात डेढ़ बजे किसी ने दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खोला तो सामने तीन लोग मौजूद थे। वह डर के मारे छिप गई। फिर वे लोग अंदर घुसकर सामान खंगालने लगे। वह जैसे- तैसे भागकर पड़ोसी मांगेराम के घर पहुंच गई। फिर जब वह पड़ोसी को लेकर लौटी तो उसका सौतेला बेटा विक्रम खून से लथपथ पड़ा था। एंबुलेंस 108 बुलाई तो उन्होंने उसे मृत घोषित कर दिया। थानाध्यक्ष अनुज सिंह ने बताया कि मृतक कई वर्ष पहले से अलग रहता था। एक माह पूर्व ही पिता की मौत के बाद वह यहां आया था। वह हरियाणा के करनाल में अपनी बुआ के घर रहता था। उसकी पत्नी भी अलग अपने मायके में ही रहती है। थानाध्यक्ष ने बताया कि हत्याकांड की कहानी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। 65 वर्षीय मां कमला देवी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही हैं।
कई सवाल हो रहे खड़े
हरिद्वार। मां ने हत्याकांड की जो कहानी बताई है उसमें कई झोल हैं। दरअसल, कमला देवी ने तीन बेहतर नस्ल के जर्मन शेफर्ड कुत्ते पाले हुए हैं। आखिर जब चोर घुसे तब कुत्ते कहां थे। ये आलम तब है जब महिला पड़ोसी मांगेराम को बुलाने गई। तब कुत्ते भी उसी के ही साथ थे और मांगेराम तक पर झपट पड़े थे। फिर कमला देवी ने कुत्तों पर काबू पाया था। एक और बड़ी बात है कि महिला के कपड़ों पर खून लगा हुआ था। जब वो शव के पास गई ही नहीं तब भला खून कैसे लगा।
पिता से नाराज होकर गया था विक्रम
हरिद्वार। तीन वर्ष पहले भी विक्रम अपने पिता से इस बात पर नाराज होकर गया था कि पिता ने उसके नाम संपत्ति करने से इंकार कर दिया था। संपत्ति के नाम पर केवल घर ही है। मां कमला देवी फिलहाल घर से ही दूध बेचने का काम करती है। ब्यूरो
दूध निकालने लगी बुजुर्ग
हारिद्वार। बुजुर्ग कमला देवी की हिम्मत का भी जवाब नहीं है। इधर, सौतेले पुत्र का शव जमीन पर पड़ा था। उधर, वह अपने पशुओं का दूध दोहने लग गई। ये देखकर हर कोई दंग रह गया। ब्यूरो