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दशहरा और मोहर्रम पर ‘सत्यमेव जयते’ की गूंज

Wed, 12 Oct 2016 12:20 AM IST
ब्यूूराो/ अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार। अधर्म करने वाला कितना भी ताकतवार क्यों न हो उसे सच्चाई के सामने परास्त होना ही पड़ता है। इस बार एक साथ मनाए जा रहे दशहरा और मोहर्रम ने पूरी मानव जाति को यह संदेश दिया है। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा और सच्चाई की राह में हजरत इमाम हुसैन का यौम-ए-शहादत एक साथ होने को महज एक संयोग समझ लिया जाए या फिर इस इत्तेफाक के पीछे परमात्मा का एक संदेश छिपा है।
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रामायण के मुताबिक लंकापति रावण प्रकांड विद्वान, कई शास्त्रों का ज्ञाता होने के साथ-साथ ही उसमें कुशल राजनीतिज्ञ के गुण भी विद्यमान थे। लेकिन अहंकार भी रावण में कूट कूटकर भरा था। माता सीता के अपहरण के फलस्वरूप भगवान राम ने उसका वध कर दिया। कुल मिलाकर तमाम गुण होने के बावजूद अहंकार रावण को ले डूबा। दूसरी तरफ हक और ईमान की लड़ाई लड़ रहे पैगंबर मोहम्मद साहब के नाती हजरत इमाम हुसैन ने जालिम बादशाह यजीद के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया। करबला की जंग में एक तरफ इमाम हुसैन का 72 लोगों का काफिला और दूसरी तरफ यजीद की पूरी फौज खड़ी थी। पूरे कुनबे का पानी बंद करने और छह महीने का बेटा प्यास से तड़पने के बावजूद इमाम हुसैन ने जुल्म के आगे झुकना गवारा नहीं किया। धोखे से इमाम हुसैन का सजदे में सिर कलम करने वाला यजीद भी करबला की जंग जीतकर भी हार गया और उसे रावण की तरह मृत्यु को प्राप्त होना पड़ा। राम-रावण युद्ध और करबला की जंग यह संदेश देती है कि अच्छाई कभी पराजित नहीं होती। अहंकार और आतंकवाद जैसी बुराइयों का खात्मा करने के लिए आज के दौर में भी भगवान राम और हजरत इमाम हुसैन की जरूरत है। हिंदू- मुस्लिम सहित समस्त मानव जाति को उनके बताए मार्ग पर चलना होगा।

दशहरा और मोहर्रम में कई समानताएं
दशहरा और मोहर्रम एक जैसा संदेश देने के साथ ही उनमें कई और भी समानताएं हैं। दशहरा जहां भगवान राम की लंकापति रावण पर विजय का पर्व माना जाता है, वहीं मोहर्रम पर ताजियादारी भी यजीद पर इमाम हुसैन की जीत का प्रतीक है।
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क्या बोले धर्मगुरु
हजरत इमाम हुसैन ने सिर्फ इस्लाम के लिए ही नहीं बल्कि पूरी इंसानियत को बचाने के लिए अपनी और अपने कुनबे की शहादत दी। हमें हर हाल में हक और सच्चाई पर कायम रहना चाहिए। इस्लाम के नाम पर बेगुनाहों का खून बहाने वाले दुनिया के किसी भी धर्म के अनुयायी नहीं हो सकते।
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 मौलाना इकबाल कासमी, मोहतमिम मदरसा इस्लामिया रशीदिया ज्वालापुर, हरिद्वार
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