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सूरत से चले यात्रियों के लापता होने पर संशय बरकरार

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सूरत से प्रवासियों को लेकर मंगलवार रात हरिद्वार आई ट्रेन से करीब 167 यात्रियों के लापता होने के मामले में बृहस्पतिवार को भी गहमागहमी की स्थिति रही। प्रशासन के सामने अभी यह सवाल बरकरार है कि इतने सारे यात्री आखिर कहां उतरे। डीएम सी रविशंकर का कहना है कि इनमें कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो यूपी के बिजनौर, मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों के रहने वाले हैं। घर आने के लिए उन्होंने हरिद्वार का पता बताकर ट्रेन के लिए पंजीकरण कराया था। ऐसे लोगों को चिह्नित कर केस दर्ज कराया जाएगा।
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मंगलवार रात सूरत से प्रवासियों को लेकर हरिद्वार आई ट्रेन में 1340 लोगों ने पंजीकरण कराया था, लेकिन स्टेशन पर 1171 यात्री ही उतरे थे। बाकी यात्री कहां गए, इसे लेकर प्रशासन में अफरातफरी की स्थिति है। अधिकारियों का मानना है कि स्क्रीनिंग से बचने के लिए ये लोग रास्ते में ही ट्रेन से उतर गए। खासतौर पर यूपी के कई स्टेशनों पर ट्रेन की गति धीमी होने पर उनके उतरने की आशंका है। डीएम सी रविशंकर ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न स्तरों पर जांच कर रहे है। क्योंकि, अगर इन लोगों में कुछ कोरोना संक्रमित हुए तो वे काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। जीआरपी और सिविल पुलिस के अधिकारी जांच में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि ट्रेन में सूरत से कितने लोग चढ़े थे, इस बारे में वहां से अंतिम सूची का इंतजार कर रहे है। उन्होंने बताया कि जल्द ही ये लोग सामने नहीं आए तो केस दर्ज कराए जाएंगे। सभी की पहचान की प्रक्रिया जारी है। वहीं, एसएसपी सेंथिल अबूदई कृष्ण राज एस का कहना है कि गुजरात के अधिकारियों से अंतिम सूची मिलने के बाद ही इस बारे में कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल यह तथ्य सामने आया है कि दिल्ली से हरिद्वार के बीच ट्रेन कहीं नहीं रुकी थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि ये लोग ट्रेन की गति कम होने पर उतरे या फिर दिल्ली से पहले ही उतर गए।
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