यूं तो डाक्टर केवल मरीजों का इलाज ही करते हैं, लेकिन जिला अस्पताल के डाक्टर्स आपसी सहयोग से रुपये इकट्ठा कर लावारिश व निर्धन मरीजों के इलाज में भी विशेष भूमिका निभाते हैं। इसमें अस्पताल का समस्त स्टाफ सहयोग देता है। इससे मरीजों के इलाज में कोई समस्या नहीं आती।
मिल रही मदद
जिला अस्पताल में एक सप्ताह में करीब एक दर्जन से अधिक मरीज लावारिश भर्ती होते हैं। इन मरीजों को इलाज से अन्य सुविधाओं के लिए अस्पताल को कोई अलग से बजट नहीं मिलता है और इसके लिए न तो कोई भी सामाजिक संस्था भी सहयोग नहीं करती है।
इन मरीजों पर न तो सर्दी के कपड़े होते है और न ही अस्पताल से बाहर की सुविधाओं के कोई धनराशि। जबकि उनके इलाज में दवाईयों व अस्पताल में सुविधाओं से अलावा भी खर्च आता है। डाक्टरों का कहना है कि यदि इन मरीजों को अस्पताल में भर्ती नहीं करते हैं तो शहर के लोग हल्ला मचाते हैं।
दूसरे भर्ती करने पर उचित इलाज नहीं मिले तो उन्हें कष्ट होता है। इसलिए किसी एक पर इसका भार नहीं पड़े सभी डाक्टर व अन्य स्टाफ आपस में सहयोग करते है और जिससे जो बनता है वह लावारिशों के इलाज को सहायता देता है।
एकत्र करते हैं मदद के लिए पैसे
अस्पताल के डाक्टर राजीव कुमार ने बताया कि प्रत्येक महीने एक स्टाफकर्मी सभी के पास आता है उसे सभी इच्छानुसार रुपये देते है। जिसमें एक महीने में पांच से सात हजार रुपये तक की सहायता राशि इकट्ठा हो जाती है और गरीब व लावारिश मरीजों को बाहर ही सुविधाएं भी उपलब्ध कराते है।