हरिद्वार। गुरु पूर्णिमा का पर्व धर्मनगरी में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। देश-विदेश के आए भक्तों ने गुरुओं के आश्रमों में जाकर गुरु पूजन किया। इस मौके पर लाखों भक्तों ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाई।
अषाढ़ पूर्णिमा का पर्व विशिष्ट पर्वों में से एक है। यह दिन गंगा से अधिक गुरुओं के नाम रहता है। लाखों भक्तों ने उत्तरी हरिद्वार के सप्तसरोवर क्षेत्र, भूपतवाला, भीमगोड़ा, हरिद्वार नगर, कनखल क्षेत्र आदि में जाकर गुरुओं की चरण वंदना की। आश्रम और अखाड़ा बाहुल्य क्षेत्रों में भक्तों की कतारें गुरु दर्शन के लिए लगी रही। आने वालों में जहां तमाम देश के श्रद्धालु शामिल थे, वहीं विदेशों से भी प्रवासी भारतीय गुरु पूजने के लिए पहुंचे। शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती, स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज, जूनापीठाधीश्वर अवधेशानंद, डा. प्रणव पंड्या, चिन्मयानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर शांतानंद शास्त्री, जयरामपीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, सतपाल ब्रह्मचारी, गुरु परमानंद, कल्याणानंद सरस्वती, देव स्वामी, कैलाशानंद ब्रह्मचारी, स्वामी अच्युतानंद तीर्थ आदि के आश्रमों में भक्तों की भीड़ लगी रही।
गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरुओं के नाम होता है। इस दिन सभी मठों और आश्रमों में महाभोजों का आयोजन किया जाता है। सायंकाल आश्रमों के मंदिरों में आरती के बाद अनेक भक्तों ने गुरुओं की भी आरती उतारी। हरिद्वार के समस्त संस्कृत महाविद्यालयों में आचार्यों का पूजन हुआ। धर्म क्षेत्र को भव्य रूप से सजाया गया था। अनेक आश्रम गुरु संकीर्तन का आयोजन हुआ। गुरुओं ने इस प्राचीन परंपरा को जीवंत रखने का संदेश दिया। नगर के सभी घाटों पर प्रात:काल जमकर स्नान हुआ। हर की पैडी पर स्नानार्थियों की भीड़ लगी रही।