चैत्र मास के समापन पर बाहरी प्रदेशों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान किया। श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर तर्पण आदि कर्मकांड भी कराए। पूर्णिमा स्नान से ही एक महीने चलने वाला वैशाख स्नान प्रारंभ हो गया। एक दिन बाद वैशाखी स्नान होगा। इसमें भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
मंगलवार को चैत्र पूर्णिमा पर सवेरे से ही गंगा तट पर उमड़ने लगे थे। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी थी। हरकी पैड़ी समेत सभी गंगा घाट श्रद्धालुओं से खचाखच भर गए। प्रात: काल और दोपहर के समय श्रद्धालुओं ने गंगा की आरती उतारी। सूर्योदय के समय तीर्थयात्रियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। बाद में कुशावर्त आदि घाटों पर जाकर जल तर्पण किया। शिव मंदिरों में भी तर्पण संपन्न कराया गया। बारह मासी स्नान करने वाले स्नानार्थियों ने चैत्र के उद्यापन किए। अनेक जगह महाभोज आयोजित किए गए। घाटों पर मुंडन, यज्ञोपवीत, कर्ण छेदन आदि संस्कार भी संपन्न कराए गए। स्नानार्थियों में सर्वाधिक संख्या राजस्थान से आए श्रद्धालुओं की थी। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में यात्री गंगा स्नान को पहुंचे।
पंजाब के यात्री 13 अप्रैल को होने वाला वैशाखी स्नान के लिए भी पहुंचने लगे हैं। उन्होंने पूर्णिका स्नान कर पुण्य अर्जित किया। इस बार मेष संक्रांति भी वैशाखी के दिन पड़ने से पर्व का महत्व और बढ़ गया है। वैशाख मास को सभी मासों में पवित्र माना जाता है। इसलिए अनेक स्नानार्थी पूरे महीने हरिद्वार में रहकर स्नान करने के लिए पहुंच गए हैं। वैशाख के सभी प्रमुख पर्वों पर स्नान होंगे। इस मास में अनेक महापुरुषों की जयंती भी पड़ती हैं।