- उद्योग संगठन के प्रतिनिधियों ने श्रम आयुक्त को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की
- उपश्रम आयुक्त के रवैये से औद्योगिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। उपश्रमायुक्त की कार्यप्रणाली को लेकर उद्योग जगत में गंभीर असंतोष व्याप्त है। सिडकुल के उद्योग संगठन ने श्रम आयुक्त को पत्र लिखकर उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन का आरोप है कि उनके कार्यकाल में श्रम कार्यालय की कार्यप्रणाली से औद्योगिक वातावरण प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रहा है।
उद्योग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राज अरोड़ा और प्रदेश महासचिव सुयश वालिया ने पत्र भेजकर बताया है कि उपश्रमायुक्त कमल जोशी पिछले लगभग छह माह से हरिद्वार में कार्यरत हैं। उनके कार्यकाल में कई फैक्टरी मालिकों और मानव संसाधन प्रबंधकों ने शिकायतें की हैं। इनमें पूर्व में निस्तारित वादों में फिर से नोटिस जारी करना एक प्रमुख मुद्दा है।
आरोप है कि नियोजकों को दोबारा वाद की पैरवी और दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा जाता है। इससे औद्योगिक प्रतिष्ठानों का अनावश्यक समय और संसाधन खर्च हो रहे हैं। सुनवाई के दौरान बाहरी व्यक्तियों की उपस्थिति और हस्तक्षेप भी एक गंभीर आरोप है। शिकायत के अनुसार, श्रमिकों की अनुपस्थिति में भी तथाकथित श्रमिक नेता उपश्रमायुक्त के कक्ष में मौजूद रहते हैं और बातचीत में दखल देते हैं। इससे सुनवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि कमल जोशी ऐसे औद्योगिक इकाइयों को फिर से नोटिस भेज रहे हैं, जिनके मामले पहले ही श्रम निरीक्षक या सहायक श्रमायुक्त द्वारा निपटाए जा चुके हैं। नियोजकों को फोन कॉल करके कार्यालय बुलाया जाता है। वहां उन्हें दोबारा पैरवी करने और संबंधित दस्तावेज देने को कहा जाता है। इस प्रक्रिया से उद्योगों का समय, श्रम और संसाधन व्यर्थ हो रहे हैं। संगठन ने ऐसे मामलों में पूर्व की कार्रवाई की जांच की मांग की है।
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बोले उपश्रमायुक्त
- शिकायत के संबंध मुझे कोई जानकारी नहीं है। अगर जांच होती है तो अपना पक्ष रखूंगा। रही बात किसी नोटिस या कार्यप्रणाली की तो नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। - कमल जोशी, उपश्रमायुक्त हरिद्वार