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‘इंसाफ में देरी भी पीड़ितों को दे रही दर्द’

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अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं । - फोटो : HARIDWAR
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बेटियों के साथ हो रहे अत्याचार को लेकर पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया कांड को लेकर चर्चा में है। दोषियों को कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद भी निर्भया के परिजनों को इंसाफ नहीं पा रहा है। कानून की कमजोर कड़ियों का फायदा उठाकर दोषी बचने की कोशिश कर रहे हैं। हर रोज कोई न कोई दलील दोषियों के पक्ष में सुरक्षा का कवच बनकर दीवार की तरह खड़ी नजर आती है। इंसाफ मिलने में हो रही यह देरी भी पीड़ित परिवार का दर्द और ज्यादा बढ़ा रही है।
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बृहस्पतिवार को चिकित्सक डॉ. संध्या शर्मा की अध्यक्षता में ‘निर्भया’ पर अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में शहर की जागरूक महिलाओं ने अपने विचार रखे। सभी का कहना था कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले। इसके लिए कानून में समुचित परिवर्तन करके प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। क्योंकि इंसाफ मिलने में जितनी देरी होती है वह पीड़ित पक्ष को उतना ही ज्यादा दर्द दे रही है। इस दौरान वक्ताओं ने बड़ी बेबाकी से अपनी आवाज उठाई। डॉ. संध्या शर्मा ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा बेहद संवेदनशील विषय है। बेटियों को घर से बाहर भेजने का विचार मन में आते ही हमें उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता हो जाती है। ऐसा माहौल बनना चाहिए ताकि हम निश्चितता का भाव महसूस करे। निर्भया कांड को लेकर उन्होंने न केवल जल्दी न्याय मिलने की वकालत की, बल्कि उनके साथ कई अन्य वक्ताओं ने भी इस मांग को आवाज दी। इस दौरान इनर व्हील क्लब की अध्यक्ष विनीता गोनियाल, सचिव मोनिका अरोड़ा, आरती अग्रवाल, सीमा अग्रवाल, तुलसी जैन, अनुराधा गुप्ता, विनती जैन, सुनीता झा, हेमा भंडारी, ऋतु तायल, शशि अग्रवाल, आरती अग्रवाल, पिंकी अग्रवाल, डोली गुप्ता, ललतेश गुप्ता, नीरजा अग्रवाल, कमला जोशी, सपना अरोड़ा, स्वाति मंगलम, गुंजन दुबे, विनीता अग्रवाल, समाजसेवी डॉ. विशाल गर्ग, विक्रम सिंह ने भी विचार रखें।
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महिलाओं की सुरक्षा बेहद संवेदनशील विषय है। अगर कानून में संशोधन कर जल्दी इंसाफ की व्यवस्था की जाए तो महिला अपराध बहुत कम हो जाएंगे।
- डॉ संध्या शर्मा
हमारा कानून बेहद ज्यादा पुराना हो गया है। समय के साथ इसमें परिवर्तन करना जरूरी है। लोगों को इंसाफ पाने के लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है।
- सपना अरोड़ा, संचालिका सांई संस्कार स्कूल
अगर इंसाफ पाना इतना ही जटिल बना रहेगा तो लोगों का कानून की व्यवस्था से विश्वास उठेगा। ऐसे में हैदराबाद कांड की परीणिती को ही सही मानने लगेंगे।
- कमला जोशी, समाज सेविका
अपराध का जन्म संस्कारों के अभाव से हो रहा है। इंसाफ पाना तो बाद की लड़ाई है पहले तो यह प्रयास होना चाहिए कि अपराध हो ही न।
- नरेश रानी गर्ग, समाज सेविका
आज बेटियों की सुरक्षा गंभीर विषय है। इस बारे में घर से लेकर कानून तक हर जगह चिंता करने की जरूरत है। सिस्टम में भी सुधार किया जाना चाहिए।
- संध्या अग्रवाल, समाज सेविका
पीड़ितों को इंसाफ मिलने में देरी तभी होती है जब राजनीति ओर पैसे का गठजोड़ हो जाता है। इंसाफ की प्रक्रिया को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।
- इशिता अरोड़ा, छात्रा
हमें अपनी बेटियों को अच्छे और बुरे का आभास कराना चाहिए। जहां तब इंसाफ में देरी का सवाल है तो महिलाओं को खुद ही दुर्गा का रूप धारण कर लेना चाहिए।
- पूजा वालिया
निर्भया प्रकरण में जिस तरह हर रोज इंसाफ मिलने में देरी हो रही है। इससे सहज ही समझा जा सकता है कि निर्भया की मां को कितना दर्द सहना पड़ रहा होगा।
- विनीता गोनियाल, अध्यक्ष, इनर व्हील क्लब
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर होने की जरूरत है। वरना महिलाओं का घर से निकला भी बेहद मुश्किल हो जाएगा। कानून में बड़े बदलाव की जरूरत है।
- अनुराधा गुप्ता
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