जनपद में प्राइवेट माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की ओर से महिला समूहों को बांटे गए ऋण की नोटबंदी के चलते माफी की अफवाह से जिले भर के गांवों से रोजाना सैकड़ों महिलाएं ऋण माफी की उम्मीद लेकर जिला मुख्यालय पहुंच रही हैं। जबकि ऋण माफी का यहां कोई योजना या आदेश निर्देश ही नहीं हुआ है। कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर महिलाएं हजारों रुपये खर्च का खाली हाथ लौट रही है।
जिले में कई निजी कंपनियों की ओर से महिलाओं को समूहों 15 हजार से लेकर 50 हजार तक का ऋण बांटा गया है। नोटबंदी के कारण ऋण माफी की अफवाह पर महिलाएं ट्रैक्टर ट्रालियों और सवारी वाहनों से बड़ी संख्या मेें जिला मुख्यालय पहुंच रही हैं। शासन- प्रशासन की ऐसी कोई गाइडलाइन न होने के बावजूद अलग- अलग दफ्तरों में प्रार्थना पत्र दिए जा रहे हैं। आने जाने का किराया और प्रार्थना पत्र टाइप कराने व कागजों की फोटोस्टेट कराने के लिए प्रति महिला 100 से 250 रुपये तक खर्च हो रहे हैं।
रुड़की के शंकरपुर, ब्रह्मपुरी, लक्सर के गंगदासपुर, झबरेड़ा के लाठरदेवा, भगवानपुर चौली शाहबुद्दीनपुर, सिरचंदी जैसे गांवों से महिलाएं शुक्रवार को जिला मुख्यालय पहुंची। रामकली, सुरेशो, कलावती, दिलशाना बानो, बिंदिया, जुबेदा आदि ने बताया कि उन्हें लोन माफी की जानकारी मिली थी। यहां आकर कागज भी तैयार करा लिए हैं, पर दफ्तर में पता चल रहा है कि ऐसी कोई योजना नहीं है। महिलाओं ने ये भी बताया कि नोटबंदी के बाद फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी किश्त तो ले जा रहे हैं, पर उसे कार्ड में दर्ज नहीं कर रहे हैं। जिससे उन्हें ठगी का अंदेशा हो रहा है।
ऐसे फैली अफवाह
जिला मुख्यालय से सटी एक प्राइवेट आवासीय कालोनी में पिछले हफ्ते एक संस्था के पदाधिकारियों और कांग्रेस की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के आने का दावा भी किया गया था, जबकि प्रशासन को कोई प्लान भी सीएम के आगमन का नहीं था। आयोजक अपने कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए महिलाओं को ऋण माफ कराने का झांसा देकर रोशनाबाद लाए थे। सीएम के नहीं आने पर उन्हें कह दिया गया कि दफ्तरों मेें आवेदन जमा किए जा सकते हैं। इसके बाद से यह अफवाह पूरे जिले में जंगल में आग की तरह फैल गई।