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डीलर और माफिया ने ठिकाने लगाया गेहूं

Thu, 02 Feb 2017 09:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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चुनावी सीजन में गरीबों के गेहूं में कटौती को लेेकर राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि गेहूं सरकार ने नहीं बल्कि कुछ राशन डीलरों और राशन माफिया ने ठिकाने लगाया है। दरअसल केंद्र ने दिसंबर से मार्च तक एपीएल का कोटा रोका है, लेकिन हरिद्वार में इससे पहले ही बड़ी संख्या में दुकानदारों को एडवांस में कोटा आवंटन कर दिया। बाद में केंद्र से गेहूं न आने पर गरीबों का राशन काट दिया गया। हालांकि अधिकारी अब एडजेस्टमेंट का दावा कर रहे हैं।       

शहर में सरकारी राशन की कालाबाजारी जोरों पर है। हरिद्वार गोदाम से करीब 85 राशन डीलरों को राशन आवंटित किया जाता है। सूत्र बताते हैं कि डीलर गोदाम से राशन उठाने से पहले ही राशन माफिया से इसका सौदा कर लेते हैं। इतना ही नहीं गोदाम से बड़े पैमाने पर राशन ही कालाबाजारी कर बाजार में बेचने वाले लोग अपने वाहनों से ले जाते हैं। राशन के इस खेल की मार इस बार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के कार्डधारकों पर पड़ी है। केंद्र से एपीएल परिवारों का गेहूं रुकने की भनक लगते ही राशन माफिया ने हड़बड़ाहट में कई दुकानदारों से गेहूं खरीद लिया। बाद में जब आदेश पहुंचा तो बाकी दुकानदारों ने भी एपीएल का गेहूं नहीं बांटा। एडवांस उठवाया गया गेहूं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के कार्डधारकों के लिए कम पड़ गया। नतीजतन उन्हें सिर्फ एक किलो गेहूं ही मिल पाया।
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धींगामुश्ती निवाले पर भारी      
राशन की कालाबाजारी का काम करने वाले हर महीने निर्धारित दुकानों पर इसको बेचते हैं। ऐसा नहीं है कि विभाग और गोदाम के अधिकारी कर्मचारियों से यह खेल छिपा हुआ है। सूत्र इस धंधे में मिलीभगत का दावा करते हैं।      
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एपीएल गेहूं का कोटा रुकने की जानकारी बाद में मिली थी, कुछ दुकानदार तब तक गोदाम से एपीएल का गेहूं ले जा चुके थे। इस कारण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के कार्डधारकों को गेहूं कम मिला है, लेकिन इसे अगले महीने एडजेस्ट कर लिया जाएगा।
- राहुल शर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी हरिद्वार
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