रुड़की/नारसन। भोगपुर में स्टोन क्रशर मालिक की गिरफ्तारी के बाद भी खनन माफिया में पुलिस प्रशासन का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। घाड़ क्षेत्र से लेकर नारसन बार्डर तक दिन में ही हजारों ट्रैक्टर ट्रालियों के खनन का खेल खेला जा रहा है। जहां एक ओर खुली आंख से खनन का यह खेल साफ दिखाई दे रहा है।
सोमवार को दिन में की घाड़ के चिल्लावाली नदी और नारसन क्षेत्र में बार्डर तक सटे सकौती घाट, मोहम्मदुपर घाट और आसफनगर घाट पर खनन होता रहा।
जिले में खनन का खेल किसकी शह पर हो रहा है। यह अबुझ पहेली तो नहीं है लेकिन इतना तय है कि बिना खाकी और खादी के गठजोड़ के इतने बड़े पैमाने पर खनन संभव नहीं है। घाड़ क्षेत्र की नदियों में तो पहले की ही तरह खनन बदस्तूर जारी ही है। साथ ही सफाई के लिए बंद की गई गंगनहर माफिया के लिए करोड़ों के वारे न्यारे कर रही हैं। वहीं सरकार को रायल्टी के नाम पर फूटी कौड़ी तक नहीं मिल रही है।
सोमवार को रुड़की से मंगलौर पटरी पर कुछ आगे निकलते ही असाफनगर घाट पर खनन का नजारा इस सच्चाई को उजागर करता दिखा। यहां दिन में ही सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रालियां खनन में जुटी थी। घाट के दोनों ओर खनन माफिया ने गंगनहर से रेत निकालकर करीब पांच हजार ट्रैक्टर ट्रालियों का रेत जमा कर लिया है। यही हाल यूपी सीमा से सटे सकौती घाट का भी है। यहां भी कई हजार ट्रैक्टर ट्राली खनन कर घाट पर ढेरी लगा दी गई है। इसके अलावा मौहम्मदपुर घाट पर भी हर दिन सैकड़ों ट्रैक्टर ट्राली खनन किया जा रहा है।
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सरकार को एक करोड़ का चूना
रुड़की। गंगनहर के घाटों पर किए गए खनन का हिसाब किताब लगाया जाए तो पता चलता है कि इस गंगनहर बंदी की आड़ में माफिया ने आठ करोड़ रुपये का रेत चोरी कर लिया जबकि सरकार को रायल्टी के रूप में एक करोड़ दस लाख रुपये का भी चूना लगा दिया। गंगनहर के तीन घाटों पर माफिया ने करीब 20 हजार ट्रैक्टर ट्राली के बराबर रेत एकत्र कर लिया है। रायल्टी की बात करें तो सरकार की ओर से प्रति घन मीटर 95 रुपये की रायल्टी और इस पर 14 प्रतिशत टैक्स को मिलाकर यह राशि 110 रुपये प्रति घनमीटर बैठती है। एक ट्रैक्टर ट्राली में करीब पांच घनमीटर रेत आता है। ऐसे में एक ट्रैक्टर ट्राली पर करीब 550 रुपये का राजस्व वसूला जाना चाहिए। इस हिसाब से नारसन क्षेत्र में घाटों पर एकत्र की गई करीब 20 हजार ट्रैक्टर ट्राली पर यह धनराशि एक करोड़ दस लाख रुपये बैठती है। इसमें बुग्गावाला क्षेत्र में हो रहे खनन की रायल्टी अलग है। वहीं यदि माफिया हो रहे फायदे की बात करें तो एक ट्रैक्टर ट्राली रेत की बाजार में कीमत करीब चार हजार रुपये हैं। इस हिसाब से माफिया ने करीब आठ करोड़ के वारे न्यारे कर लिए हैं।