यूपी के खनन के धंधे में ‘भाई’ का एकछत्र राज है। उसके एक इशारे पर पुुलिस और प्रशासन से लेकर वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी एक्शन में आ जाते हैं। ‘भाई’ बाहुबल से ही स्टोन क्रशरों को संरक्षण प्रदान नहीं करता बल्कि उच्चाधिकारियों की जेबों को भी गर्म करता है।
यही कारण है कि जब उत्तराखंड से आधे दाम में मिलने वाली खनन सामग्री की खेप यूपी को पहुंचती है, तो ‘भाई’ ही नहीं प्रशासनिक अमला भी विरोध में खड़ा हो जाता है। एनजीटी की ओर से करीब तीन वर्ष उत्तर प्रदेश में बुग्गावाला के पास राजाजी वन क्षेत्र से सटी जमीनाें के पट्टे जारी करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
तब से सहारनपुर क्षेत्र का एक माफिया स्टोन क्रशराें को अपने संरक्षण में खनन कराता है और वह सभी सुविधाएं प्रदान करता है, जो उन्हें चाहिए। इस माफिया के संरक्षण में सहारनपुर से लेकर मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा तक कोई भी अधिकारी खनन के वाहनों को रोकने की हिम्मत नहीं करता।
इसके एवज में वह स्टोन क्रशराें से 32 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से पैसा वसूलता है और इसका हिस्सा पुलिस प्रशासन से लेकर राजनीति के धुरंधरों तक भी पहुंचता है। इस बड़े नेटवर्क के बीच किसी की हिम्मत माफिया को चुनौती देने की नहीं है।
दादागिरी के बल पर जुटाई गई इस खनन सामग्री को यूपी के महानगरों में करीब 62 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचा जाता है। जबकि उत्तराखंड में बिना रायल्टी चुकाए यह खनन सामग्री मात्र 32 रुपये प्रति क्विंटल में बिक्री की जा रही है।
ऐसे में उत्तराखंड की खनन सामग्री यूपी में पहुंचते ही भाई के कारोबार को चोट लगती है और समय-समय पर पुलिस प्रशासन की शह पर यहां के वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो जाती है। इस बार की कार्रवाई के पीछे भी यही एक बड़ी वजह मानी जा रही है।