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तस्करों का गिरोह को तोडने में जुटा वन प्रभाग

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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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हरिद्वार वन प्रभाग वन तस्करों पर नकेल कसने और तस्करों के गिरोह को तोड़ने के प्रयास में जुट गया है। इसके लिए विभाग तस्करों के गिरोह में अपना मुखबिर शामिल करेगा या फिर किसी तस्कर को ही अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रहा है। वन प्रभाग की इस कार्रवाई से बड़े वन तस्करों और तस्करों के गिरोह में शामिल वनकर्मियों के नाम का खुलासा भी हो सकता है।
कुछ समय से हरिद्वार में वन तस्करों की सक्रियता काफी बढ़ गई है। बीते वर्ष 1 जून को श्यामपुर क्षेत्र खैर के कई पेड़ काटे गए थे। सात फरवरी को चिड़ियापुर रेंज में 6 खैर के पेड़ काटे गए। 9 जुलाई को खानपुर में वन प्रभाग की भूमि पर 18 खैर के पेड़ कटे मिले। इसी वर्ष पथरी में भी कई पेड़ों के काटे जाने का मामला सामने आया। जुलाई और अगस्त में वन तस्करों ने कई बार बैरागी कैंप के ठोकर नंबर दस से शीशम की डाट चोरी करने का प्रयास किया। 26 अगस्त को ठोकर नंबर दस पर वन दरोगा गजेंद्र सिंह ने देर रात हवा में फायर कर दो दर्जन वन तस्करों को खदेड़ा था। इसके बाद 9 सितंबर को चंड़ी घाट पुल के समीप उत्तराखंड़ सिंचाई विभाग की जमीन पर 15 खैर के पेड़ों पर अवैध रूप से आरी चला दी गई, लेकिन विभाग के हाथ कोई तस्कर नहीं लगा। खैर के पेड़ काटने में विभाग के पास कई वन तस्करों के नाम सामने आए हैं, जिनका लिंक ऊधमसिंह नगर और उत्तर प्रदेश के पीपली जंगलों से हैं। साथ ही तस्करों के साथ मिले हुए कई वनकर्मियों के नाम भी सामने आए हैं। जिसकी जांच में वन प्रभाग की टीम लगी हुई है। सूत्रों की मानें तो वन प्रभाग का कोई अधिकारी भी तस्करों के साथ मिला हुआ है। वन प्रभाग की इस प्रकार की रणनीति से कई वनकर्मी भी सकते में आ गए हैं।
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सामने आए वनकर्मियों और तस्करों के नाम गुप्त रखे गए हैं। अभी जांच की जा रही। तस्करों को पकड़ने के लिए उनके गिरोह को भी तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
- आकाश वर्मा, डीएफओ
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