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पलक झपकते ही उड़ा लेते है शगुन-जेवरात से भरा बैग

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हरिद्वार। शादी-विवाह और अन्य मांगलिक समारोह में जेवर व रुपयों से भरा बैग पर हाथ साफ करने वाले बच्चे बेहद शातिर हैं। समारोह में शामिल होने पर कोई संदेह न करे इसके लिए वह सजधज कर आते हैं। इसलिए लोग भी उन्हें मेहमान या मेजबान समझते हैं।
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कनखल के होटल गैंगेज रिवेर में घटी वारदात ने एक बार फिर बच्चा चोर गैंग को लेकर ध्यान खींचा है। अमूमन ये गैंग शादी ब्याह के सीजन में ही सक्रिय होता है। इस वारदात में एक नई बात यह सामने आई है कि अब ये छोटे उस्ताद भी अच्छा पहनावा कर वारदात को अंजाम दे रहे हैं। जबकि पूर्व में कई बार यह पहनावे के कारण पकड़ में आ जाते थे और इन्हें आयोजक मंडप से बाहर भी कर देते थे। इस नए ट्रेंड ने हर किसी के कान खड़े कर दिए है, एक बारगी पुलिस भी इस नए ट्रेंड से सन्न रह गए। बच्चा चोर गैंग पूरी तरह से प्रशिक्षित होता है। ये सभी घुमंतू प्रवृति की जातियों से ताल्लुक रखने वाले होते है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, यूपी में रहने वाले आपराधिक जातियों के परिवार शादी ब्याह के सीजन में विशेषकर चोरी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए ही निकलते हैं।
इनके परिवार के पुरुष साथ में नहीं आते है, केवल महिलाएं ही साथ में आती हैं। महिलाएं विवाह मंडप के इर्द गिर्द मंडराती हैं और घटना में सफलता मिलने के बाद ये मिनट भर में शहर बदलने में यकीन रखते हैं। सीसीटीवी कैमरों में कैद होने की बात ध्यान में रखकर उस शहर में फिर रहना उचित नहीं समझते है। ये बच्चे भी आठ से दस साल की उम्र के होते हैं, इन्हें ये भी सीखाया जाता है कि पकड़े जाने पर यह नहीं बताना है कि साथ में कौन कौन हैं। यही नहीं ये गंदगी भी एक पॉलीथिन में रखते हैं, यदि कोई इन्हें पकड़ना चाहता है तो गंदगी को कपड़ों पर डाल देते है ताकि किसी के हत्थे नहीं चढ़े। पुलिस चाहकर भी इन्हें जेल नहीं भेज पाती, क्योंकि ये शातिर उम्र में बेहद ही छोटे होते है। एसपी सिटी ममता वोहरा ने बताया कि बच्चा चोर गैंग विवाह मंडप में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते है, इसलिए आमजन को भी एक्टिव रहना चाहिए।
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