कोरोना वायरस से संक्रमित आए करीब 700 मरीजों में स्वास्थ्य संबंधित कोई दिक्कत अभी तक सामने नहीं आई है। कोरोना के प्राथमिक लक्षण तक नहीं है। किसी भी पीड़ित को खांसी, जुकाम, बुखार, सांस में दिक्कत जैसी कोई बीमारी तक नहीं है। पीड़ित भरपूर भोजन और नींद ले रहे हैं। ऐसे में बिना लक्षण वाले मरीज मिलने से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बढ़ गई है।
चार अप्रैल के बाद से अब तक जनपद में करीब 700 पॉजिटिव मरीजों के मामले सामने आ चुके हैं। पीड़ित मरीज मेला अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में भर्ती हैं। उनका इलाज भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की गाइड लाइन के अनुसार हो रहा है। हालांकि अभी तक भर्ती हुए किसी भी मरीज को ग्लूकोज, निडिल आदि लगाने की जरूरत तक नहीं पड़ी है। इलाज कर रहे जिला अस्पताल के फिजीशियन संदीप टंडन ने बताया कि भर्ती मरीजों में से किसी को भी स्वास्थ्य संबंधी कोई दिक्कतें सामने नहीं आई है। स्वास्थ्य जांच के लिए जब उनका बीपी, ब्लड सैंपल, शुगर, पल्स आदि की जांच की जाती है तो सभी बड़े अच्छे से बातें करते हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी यही चुनौती है कि मरीज कोरोना के किसी भी लक्षण से नहीं पहचाने जा रहे हैं। ऐसे में कौन व्यक्ति कोरोना की चपेट में आ चुका है यह बिना टेस्ट के कहा नहीं जा सकता है। वहीं बहुत से ऐसे लोगों के भी सैंपल लिए गए हैं जिनमें कोरोना के सामान्य लक्षण जैसे खांसी, बुखार या जुकाम दिखाई दिया हो। रिपोर्ट में ये नेगेटिव पाए गए हैं।
यह हैं सभी पीड़ितों की दिनचर्या
सभी भर्ती मरीज सुबह सही तरीके से सोकर उठते हैं। उठने के बाद वे कुछ चहलकदमी के बाद अपने बेड के आसपास ही व्यायाम करते हैं। इसके बाद आठ बजे उन्हें नाश्ता मिलता है। इसमें दूध-चाय, फल, ब्रेड, अड्डा होते हैं। दोपहर को एक से दो बजे के बीच भोजन दिया जाता है। भोजन में रोटी, चावल, दो सब्जी, सलाद और फल होता है। शाम को फिर से चाय- बिस्किट और इसके बाद रात में आठ बजे भोजन करते हैं। यदि किसी मरीज के घर से भोजन आता है तो उसे उस तक पहुंचा दिया जाता है। इसके बाद फिर रात में सो जाते हैं।