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युवा केंद्र में फिर हुआ विवाद

Thu, 13 Apr 2017 10:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो हरिद्वार
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जवाहर लाल नेहरू युवा केंद्र (एनडी तिवारी यूथ हॉस्टल) में बुधवार देर रात एक बार फिर विवाद हो गया। दिवंगत कांग्रेसी नेता हर्षवर्द्धन शर्मा के बेटे-बेटी के रसोई का सामान हॉस्टल में शिफ्ट करने को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पुलिस को पहुंचकर बीच बचाव करना पड़ा। बृहस्पतिवार को भी दिवंगत नेता के परिजन और दूसरा पक्ष दिनभर थाने में ही डटे रहे और एक दूसरे को गलत ठहराते रहे।
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युवा केंद्र की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को लेकर विवाद चल रहा है। स्थानीय केंद्र की भी दो कार्यकारिणी बनी हुई है और दोनों ही केंद्र में काबिज है। वे एक दूसरे को फर्जी करार देते रहते है। एक कार्यकारिणी के सचिव रहे कांग्रेसी नेता हर्षवर्द्धन शर्मा का हाल ही में निधन हो गया था। तब से उनके परिजन हॉस्टल में ही रह रहे हैं।  आरोप है कि बुधवार देर रात दिवंगत नेता की बेटी और बेटा रसोई का सामान शिफ्ट कर रहे थे तो दूसरी कार्यकारिणी के पदाधिकारी संजय जोशी, सुखबीर ढींढसा, आदित्य पंडित आदि विरोध में उतर आए। बात इतनी बढ़ी कि पुलिस को बुलाना पड़ा। कोतवाली प्रभारी प्रदीप बिष्ट ने पहुंचकर शांति व्यवस्था बनाए रखने की हिदायत दी। बृहस्पतिवार को दोनों पक्ष कोतवाली पहुंचे और खुद को सही ठहराया। दिवंगत नेता के परिजन ने एक पत्र सौंपकर खुद को हास्टल में रहने का पात्र  बताया तो दूसरे पक्ष ने खुद को असली ठहराया।       

एक पक्ष की ओर से पदम प्रकाश शर्मा, धर्मपाल, सुभाष घई, धर्मेद्र विश्रोई, सुखबीर ढीढसा आदि पहुंचे थे। इसी दौरान कोतवाली में मौजूद रहे एसपी सिटी परमेंद्र डोबाल ने भी दोनों पक्ष को सुना और कानून व्यवस्था हाथ में न लेने की हिदायत दी।
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आखिर कुर्क क्यों नहीं करता प्रशासन
इस बात से इंकार नहीं कर सकते है कि युवा केंद्र एक न एक दिन बड़े विवाद का कारण बन जाए। शहर के बीचोंबीच इस संपत्ति पर कई निगाहें लगी हुई है और लंबा चौड़ा खाली मैदान भी है। एक बारगी इस मैदान पर एक पब्लिक स्कूल खोलने का ब्लूप्रिंट तक तैयार कर लिया गया था।  पदाधिकारियों में मतभेद उभरने पर योजना परवान नहीं चढ़ पाई। अब इस संपत्ति के प्रबंधन पर दो कार्यकारिणी अपना दावा कर रही है। रुड़की और हरिद्वार के  कुछ गुंडा तत्वों का भी यह संस्था अड्डा बन रही है। ऐसे में  आशंका जताई जा रही कि कभी खूनी संघर्ष न हो जाए। ऐसे में पुलिस को सीआरपीसी की धारा 145 के तहत विवादों में घिरी इस संपत्ति को कुर्क कर रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज देनी चाहिए। जिला प्रशासन की सुनवाई में जो पक्ष सही होगा उसका अधिकार प्रबंधन होगा।
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