लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम पर कार्यशालाएं होंगी, महिलाओं को जागरूक किया जाएगा
माई सिटी रिपोर्टर
हरिद्वार। जिला प्रशासन ने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए पहल तेज कर दी है। इसी क्रम में केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत गठित स्थानीय परिवाद समिति हरिद्वार की बैठक गुरुवार को आयोजित हुई। बैठक में दस या अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य करने पर जोर दिया गया।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर जनपद के सभी शासकीय, अर्धशासकीय और गैर-शासकीय संस्थानों में लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम के प्रभावी अनुपालन पर चर्चा की गई। जिला प्रोबेशन अधिकारी अविनाश भदौरिया ने बताया कि जिन कार्यस्थलों पर 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां नियमानुसार आंतरिक शिकायत समिति बनाना अनिवार्य है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में सभी संबंधित संस्थानों और विभागों को निर्देश जारी करने के लिए पत्र तैयार किया गया है। विभागों को अपने कार्यस्थलों पर आंतरिक शिकायत समिति गठित कर इसकी सूचना जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय को देनी होगी।
आंतरिक शिकायत समिति का गठन कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यह समिति लैंगिक उत्पीड़न की शिकायतों को प्राप्त करती है और उनकी निष्पक्ष जांच करती है। इसका उद्देश्य महिलाओं को बिना किसी डर के अपनी शिकायतें दर्ज कराने का मंच प्रदान करना है। यह कदम कार्यस्थलों पर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
स्थानीय शिकायत समिति की अध्यक्ष और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की ब्रांड दूत डॉ. मनु शिवपुरी ने कहा कि महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल देना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जल्द ही एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इन कार्यशालाओं से महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा। बैठक में शशि शर्मा और अधिवक्ता रश्मि उपाध्याय भी उपस्थित थीं।