सराफा व्यापारियों ने किया पैदल मार्च
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हरिद्वार। सराफा व्यापारियों के समर्थन में भारत बंद का असर हरिद्वार में बेअसर रहा। कनखल, ज्वालापुर, मध्य हरिद्वार, शिवालिक नगर में बाजार बंद करने के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई। अधिकतर जगह दुकानें सुबह की खुल गई थी। कुछ जगह दोपहर से पहले ही व्यापारियों ने अपनी दुकानें खोल दी। स्थिति यह थी कि प्रेस के सामने आकर सराफा व्यापारियों को समर्थन देने वाले व्यापारी नेताओं ने भी अपनी दुकानें बंद नहीं रखी।
केंद्र सरकार की तरफ से कर लगाने और खरीददारी के लिए पैन नंबर की अनिवार्यता के विरोध में सराफा कारोबारी करीब एक महीने से आंदोलनरत हैं। एक महीने से सराफा कारोबारी अपनी दुकानों को बंद करके केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध कर रहे हैं। रविवार को प्रेस क्लब सभागार में पत्रकारों से रूबरू हुए ज्वैलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के संग पहुंचे व्यापार मंडल के तीनों गुटों के पदाधिकारियों ने दावा किया था कि ज्वैलर्स के साथ सोमवार को बंद में शामिल होगे। केवल यात्री बाहुल्य क्षेत्र छोड़कर पूरे शहर के व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। लेकिन सोमवार को शहर बंद की घोषणा की हवा ही निकल गई।
सुबह से ही जगह जगह व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के शटर उठते चले गए। कहीं भी बाजार खुलने का विरोध देखने को नहीं मिला। ये आलम तब रहा जब व्यापार मंडल के नेताओं ने बाजार बंद रखने का दावा किया था। शिवालिक नगर, कनखल, ज्वालापुर व मध्य हरिद्वार में कई जगह तो बाजार सुबह से ही खुले थे जबकि अधिकतर जगह ग्यारह बजे तो कहीं 12 बजे खोले गए। खास बात यह रही कि व्यापार मंडल के नेताओं के व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी खुले रहे। व्यापार मंडल के नेता बाजार खुलने को लेकर कोई भी टिप्पणी देने से बचते रहे।
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व्यापार मंडल को चट कर गई राजनीति की दीमक
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। सोमवार को बाजार बंदी के दावे धड़ाम होने से एक बात साफ हो गई कि गुटों में बंटने के बाद व्यापारी नेताओं की पकड़ भी ढीली हो गई है। कुंभनगरी में व्यापार मंडल की राजनीति का बुरा हाल है। व्यापारी नेता तीन तीन गुटों में बंटे है। यही कारण है कि कभी विभाजन से पहले हरिद्वार के व्यापार मंडल की गूंज यूपी की राजधानी लखनऊ में होती थी। कुंभनगरी में होने वाले कुंभ, अर्द्धकुंभ, कांवड़ से लेकर छोटे छोटे मेले कभी बिना व्यापार मंडल के सहयोग के संपन्न नहीं हुए हैं पर अब कुछ समय से गुटों में बंटने के कारण प्रशासन भी अब खास तवज्जो नहीं दे रहा है। व्यापार मंडल के बिखराव के पीछे असल कारण राजनेताओं का दखल होना है। क्योंकि व्यापारी वर्ग का नेता होने का दम भरने वाला शख्स किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़ा है और अपने आका के इशारे पर ही व्यापार मंडल की राजनीति का संचालन करता है। लेकिन सोमवार को असल में व्यापारी वर्ग ने ही अपने नेताओं को आइना दिखा दिया।