अनुसूचित जाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकार अधिनियम 2006) के तहत तहसील हरिद्वार में उप जिलाधिकारी पूरन सिंह की अध्यक्षता में उपखंड स्तरीय समिति की बैठक हुई। जिसमें जमीनों के मालिकाना हक के लिए लोगों की ओर से दावे पेश किए गए हैं। दावों को स्वीकृति मिलने के बाद वन ग्राम राजस्व बन सकेंगे।
बैठक में वन अधिकार अधिनियम 2006 के संबंध में सभी को अवगत कराया गया। वन ग्राम को राजस्व ग्राम बनने संबंधी प्रस्ताव जिलास्तरीय समिति को भेजे जाने के संबंध में चर्चा की गई। पुरुषोत्तम नगर से कुल 65 काश्तकारों और 13 मजदूरों के दावे प्रपत्र भरे। जबकि कमला नगर से 25 मूल काश्तकार एवं 5 मजदूरों के दावे प्रपत्र समिति के समक्ष प्रस्तुत किए गए।
लोगों की ओर से बताया गया कि वन ग्राम में न कोई विद्यालय है और न ही बारात घर है। न कोई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध है। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उप प्रभागीय वन अधिकारी संदीपा शर्मा ने बताया कि 1930- 31 में टोंग्या पद्धति अपनाई गई थी, जिसमें पौधरोपण कार्यक्रम के तहत टोंगिया ग्राम बसाए गए थे। उप जिलाधिकारी हरिद्वार की ओर से शीघ्र ही वन ग्राम को राजस्व ग्राम बनने संबंधी प्रस्ताव को जिला स्तरीय समिति को भेजने के लिए निर्देशित किया गया। इस मौके पर सहायक समाज कल्याण अधिकारी शालिनी बलोदी, वन विभाग के सर्वेयर हरीश चंद ध्यानी, वन ग्राम कमला नगर एवं पुरुषोत्तम नगर के ग्राम वन अधिकार समिति के अध्यक्ष और सचिव आदि मौजूद रहे।